भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

सागर में भूतों के देव का अनोखा मंदिर! सावन में 20 से...


Last Updated:

श्री देव भूतेश्वर महादेव के नाम के पीछे भी बड़ी रोचक कहानी है बता दें कि इस मंदिर के पास में शमशान घाट है और पहले यहां पर वीरान जंगल हुआ करता था और यहां लोग रात के समय आने में डरते थे ऐसे में लोग भूतों का महादेव कहते थे और इस तरह से फिर यह भूतेश्वर हो गए और आज भी इसी नाम से जाने जाते हैं.

कहते हैं कंकड़ कंकड़ में शंकर है और जहां उनको स्थापित कर दें. उनका नाम हो जाता है. ऐसे ही सागर में शमशान घाट के शिवलिंग को स्थापित किया तो इन्हें भूतों का देव भूतेश्वर कहा जाने लगा. वैसे तो इस मंदिर का इतिहास किसी को पता नहीं. लेकिन नाथ संप्रदाय द्वारा की गई स्थापना और अलग-अलग मिलते साक्ष्यों के आधार पर यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना बताया जाता है. यह सागर जिले का एकमात्र उत्तर मुखी शिवलिंग है.

श्री देव भूतेश्वर भगवान केवल सागर ही नहीं बल्कि आसपास की क्षेत्र में भी श्रद्धा का केंद्र है. सावन के महीने में श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है. इस सावन यहां पर असाध्य रोग शांति औषधि अभिषेक किया जा रहा है और फिर इस औषधि को प्रसाद के रूप में वितरित किया जा रहा है धार्मिक कार्य में लिया जा रहा है.भूतेश्वर महादेव को रोजाना अलग-अलग आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और औषधीय दिव्य पदार्थों से अभिषेक किया जा रहा है. मंदिर समिति के कोसा अध्यक्ष विकास तिवारी बताते हैं कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है. बल्कि भारतीय परंपरा में प्रकृति, आयुर्वेद और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय का प्रतीक है.

वैदिक मंत्र उच्चार के साथ अभिषेक कर सकते
सावन महीने में होने वाले इस विशेष अनुष्ठान में बरगद, पीपल, नीम, पान, मीठी नीम, गिलोय, अमरबेल, भांग, कच्ची हल्दी, शहद, त्रिफला, बाला, अतिबाला, अश्वगंधा, निर्गुडी, वच, जटामांसी, पुनर्नवा, दारुहल्दी, शिलाजीत, अर्जुन, कचनार, विभिन्न फलों के रस और मधुरस सहित 20 से अधिक औषधीय पदार्थों से भगवान शिव का स्नान कराया जा रहा है. शिव स्वयं औषधियों के अधिपति हैं. औषधीय अभिषेक रोग शांति, मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा में लाभदायक है. इसलिए भूतेश्वर भगवान को रोजाना अलग-अलग औषधियों से अभिषेक किया जा रहा है.वही जो यजमान यह आयुर्वेदिक अभिषेक करना चाहते हैं. उनके लिए भी इसकी व्यवस्था की गई है. मंदिर में ही एक दिन पहले रसीद कटवा कर वैदिक मंत्र उच्चार के साथ अभिषेक कर सकते हैं.

मंदिर परिसर में 400 साल पुरानी मस्तराम बाबा की समाधि
मंदिर समिति के अनुसार अभिषेक में उपयोग की गई औषधियों को पवित्र माना जाता है. इन्हें सुरक्षित रूप से एकत्र कर श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वितरित किया जा रहा है. कुछ औषधियां मंदिर परिसर में पौधारोपण और धार्मिक उपयोग में भी लाई जा रही हैं. ताकि प्रकृति संरक्षण और औषधीय पौधों के महत्व का संदेश समाज तक पहुंचाया जा सके.श्री देव भूतेश्वर महादेव के नाम के पीछे भी बड़ी रोचक कहानी है. इस मंदिर के पास में शमशान घाट है और पहल वीरान जंगल हुआ करता था. यहां लोग रात के समय आने में डरते थे ऐसे में लोग भूतों का महादेव कहते थे और इस तरह से फिर यह भूतेश्वर हो गए. आज भी इसी नाम से जाने जाते हैं. यहां मंदिर परिसर में 400 साल पुरानी मस्तराम बाबा की समाधि है जो पहले रहा करते थे. एक बावड़ी है जो लगभग 700 साल पुरानी बताई जाती है.

सावन में हो रहा औषधीय अभिषेक
भूतेश्वर मंदिर परिसर में पिछले 30 साल से अखंड गौरी शंकर सीताराम नाम का संकीर्तन कीर्तन चल रहा है. 24 घंटे यहां गौरी शंकर सीताराम का जय घोष होता रहता है शहर भर के श्रद्धालु जाकर इसमें अपना योगदान दे रहे हैं.भूतेश्वर मंदिर परिसर आस्था का बड़ा केंद्र है. गुलाब बाबा ट्रस्ट के द्वारा अब इस मंदिर का भव्य निर्माण कराया जा रहा है पिछले 4 साल से इसका निर्माण कार्य चल रहा है. अभी 4 साल और होना है प्रमुख रूप से गर्भ ग्रह को लेकर कार्य किया जा रहा है. अभी गर्भगृह 9 बाई 9 का है. यह 18 बाई 18 का हो जाएगा. जिससे श्रद्धालु आसानी से सुलभता के साथ दर्शन कर सकेंगे. यहां धौलपुर पत्थरों से मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top