भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नवीन के नेतृत्व में अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है. इस टीम में कई अनुभवी चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां मिली हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की वापसी की हो रही है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर हुईं स्मृति ईरानी को अब बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव की अहम जिम्मेदारी दी है. इसे सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए पार्टी की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद स्मृति ईरानी ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताया. उन्होंने एक्स पर लिखा कि एक साधारण बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक पदों तक पहुंचा, यह उनके लिए बेहद विनम्र करने वाला अनुभव है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का भरोसा जताने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वह जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के साथ ‘विकसित भारत’ के संकल्प में योगदान देंगी.
टीवी की ‘बहू’ से BJP की ‘रणनीतिकार’ तक
स्मृति ईरानी का राजनीतिक सफर काफी अलग रहा है. टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री से राजनीति में कदम रखने वाली स्मृति धीरे-धीरे बीजेपी के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गईं. मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले और पार्टी के भीतर अपनी अलग पहचान बनाई.
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार के बाद उनकी सक्रिय केंद्रीय भूमिका सीमित हो गई थी. अब राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पार्टी ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय संगठन के केंद्र में ला दिया है.
अमेठी ने दी थी ‘जायंट किलर’ की पहचान
स्मृति ईरानी का नाम उत्तर प्रदेश और खासकर अमेठी की राजनीति से गहराई से जुड़ा हुआ है. 2014 में उन्होंने पहली बार अमेठी से चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में वह राहुल गांधी से हार गईं, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने क्षेत्र से अपना संपर्क नहीं तोड़ा.
पांच साल तक लगातार अमेठी में सक्रिय रहने, गांवों में पहुंच बनाने और स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ संगठन मजबूत करने का फायदा उन्हें 2019 में मिला. उस चुनाव में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को 55,120 वोटों से हराकर कांग्रेस के गढ़ में बड़ा उलटफेर किया था. राहुल गांधी 2004 से अमेठी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. इस जीत के बाद स्मृति ईरानी को बीजेपी की ‘जायंट किलर’ नेताओं में गिना जाने लगा.
लेकिन 2024 में तस्वीर बदल गई. कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने उन्हें 1.67 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हरा दिया. इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में स्मृति ईरानी की पहचान और उनकी राजनीतिक पहुंच पूरी तरह खत्म नहीं हुई. यही वजह है कि राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनकी वापसी को यूपी की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
2027 के यूपी चुनाव पर BJP की नजर
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य में बीजेपी को उम्मीदों के मुताबिक सफलता नहीं मिली थी. विपक्षी INDIA गठबंधन ने 80 में से 43 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि NDA को 36 सीटें मिलीं. इनमें बीजेपी के खाते में 33 सीटें आईं.
ऐसे में बीजेपी अब संगठन को नए सिरे से मजबूत करने में जुटी है. नई राष्ट्रीय टीम में स्मृति ईरानी के साथ सुनील बंसल, विनोद तावड़े, बिप्लब कुमार देब और सतीश पूनिया जैसे अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. इन नियुक्तियों को चुनावी मशीनरी को और धार देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश में बीजेपी का संगठन मजबूत करने का लंबा अनुभव है. बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने, लाभार्थियों से संपर्क और डेटा आधारित चुनावी रणनीति को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही है. वहीं, स्मृति ईरानी का चेहरा पार्टी के लिए अलग तरह की ताकत है. वह पर्दे के पीछे काम करने वाली संगठनकर्ता के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर आक्रामक चुनावी अभियान चलाने वाली नेता के तौर पर जानी जाती हैं.
महिला वोटरों पर भी BJP का फोकस
स्मृति ईरानी की वापसी को बीजेपी की महिला वोटरों पर बढ़ती पकड़ की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. पिछले एक दशक में महिला मतदाता बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण चुनावी आधार बनी हैं. उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी योजनाओं के जरिए पार्टी ने महिलाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश की है.
स्मृति ईरानी खुद महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं और बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं. ऐसे में उनके पास प्रशासनिक अनुभव के साथ महिला संगठन का भी मजबूत अनुभव है.
राहुल गांधी के खिलाफ पुरानी कहानी फिर जिंदा?
स्मृति ईरानी की नियुक्ति का एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक पहलू भी है. अमेठी में राहुल गांधी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाली स्मृति अब उसी राज्य में पार्टी की नई रणनीति का हिस्सा बनने जा रही हैं, जहां कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में संगठन को फिर खड़ा करने की कोशिश कर रही है.
बीजेपी की नई टीम में स्मृति ईरानी की एंट्री से साफ है कि पार्टी उनके राजनीतिक अनुभव, आक्रामक प्रचार शैली और उत्तर प्रदेश में उनकी पहचान का इस्तेमाल करना चाहती है. अब सवाल सिर्फ यह है कि 2019 में अमेठी की ‘जायंट किलर’ बनीं स्मृति ईरानी 2027 में उत्तर प्रदेश की सियासी जंग में बीजेपी के लिए कितना बड़ा फर्क पैदा कर पाएंगी.