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गर्भावस्था के दौरान गाय की उचित देखभाल बेहद जरूरी है। इस अवधि में संतुलित आहार, स्वच्छ आवास और नियमित स्वास्थ्य निगरानी से न केवल गर्भस्थ बछड़े का बेहतर विकास होता है, बल्कि प्रसव के बाद गाय का दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता भी अच्छी रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र मोहन मिश्रा ने पशुपालकों को गर्भित गाय की देखभाल में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। अंतिम 2-3 महीने पोषण पर दें विशेष ध्यान डॉ. मिश्रा के अनुसार गर्भावस्था के आखिरी 2-3 महीनों में बछड़े का विकास तेजी से होता है। इसलिए गाय को गुणवत्तापूर्ण हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित दाना देना चाहिए। शरीर की स्थिति लगभग 3 से 3.5 अंक तक बनाए रखना उचित है, यानी गाय कमजोर नहीं होनी चाहिए। आहार में पर्याप्त खनिज मिश्रण और नमक दें तथा हर समय साफ और ताजा पानी उपलब्ध रखें। अंतिम गर्भावस्था में दाने की मात्रा अचानक न बढ़ाएं, बल्कि जरूरत के अनुसार धीरे-धीरे बढ़ाएं। फफूंदयुक्त, सड़ा या विषाक्त चारा बिल्कुल न दें। साफ-सूखा स्थान और हल्का व्यायाम जरूरी: गाय को स्वच्छ, सूखे, हवादार और फिसलन रहित स्थान पर रखें। गीली जगह और भीड़भाड़ से बचाएं। गर्भावस्था के अंतिम दिनों में उसे शांत और अलग स्थान देना बेहतर है। सामान्य अवस्था में हल्का-फुल्का चलने दें, लेकिन दौड़ाने, लंबी दूरी तक चराने या कठिन श्रम से बचाएं। अन्य पशुओं से लड़ाई न होने दें। टीकाकरण में लापरवाही न करें : पशु की भूख, जुगाली, गोबर और व्यवहार पर नियमित नजर रखें। पशु चिकित्सक की सलाह से एफएमडी, एचएस, बीक्यू आदि के टीके समय पर लगवाएं। गर्भावस्था में कोई दवा, हार्मोन या कृमिनाशक अपने स्तर से न दें। प्रसव से पहले करें तैयारी: यदि गाय दूध दे रही है तो प्रसव से करीब 45-60 दिन पहले सुखा करना सामान्यतः उचित माना जाता है। यह अवधि अगले दुग्ध उत्पादन और बछड़े के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। प्रसव नजदीक आने पर थन में भराव, योनि से चिपचिपा स्राव, पूंछ के आसपास सूजन और बार-बार उठने-बैठने जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। ऐसे समय स्वच्छ, सूखा और शांत प्रसव स्थान तैयार रखें। डॉ. रविंद्र मोहन। आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 947014 7400 पर सिर्फ मैसेज करें।
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