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बरसात में गाय-भैंस का दूध हो रहा कम? पशु चिकित्सक ने बताया...


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बरसात में गाय-भैंस का दूध हो रहा कम? पशु चिकित्सक ने बताया बचाव का तरीका

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Monsoon animal care Tips: देवघर में बरसात के मौसम में पशुपालकों को गाय, भैंस और बकरी की सेहत पर खास ध्यान देने की जरूरत है. कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन के अनुसार, बारिश में गीले चारे, गोहाल में कीचड़ और गंदगी के कारण पशु बीमार पड़ सकते हैं. इसका असर दूध उत्पादन पर भी पड़ता है. पशुपालकों को चारे को धूप में सुखाकर खिलाने, गोहाल में चूने का छिड़काव करने और समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी गई है.

देवघर: झारखंड के देवघर में बरसात का मौसम शुरू होते ही गांवों में हरियाली बढ़ जाती है. खेतों में हरा चारा भी भरपूर मिलने लगता है. इससे पशुपालकों को लगता है कि अब पशुओं के खाने की चिंता नहीं रहेगी. लेकिन बारिश का मौसम पशुओं की सेहत के लिहाज से सावधानी बरतने का समय भी है. बारिश के दौरान चारे में नमी बढ़ जाती है. गोहाल में कीचड़ और पानी जमा हो जाता है. आसपास गंदगी रहने से भी पशुओं की सेहत प्रभावित हो सकती है. इसका सीधा असर दूध देने वाली गाय और भैंस पर पड़ सकता है. कई बार पशु खाना कम कर देता है. वह सुस्त रहने लगता है. धीरे-धीरे दूध उत्पादन भी कम हो सकता है. ऐसे में गांवों में गाय, भैंस या बकरी पालने वाले लोगों को बरसात में साफ-सफाई और खान-पान पर खास ध्यान देना चाहिए. पशुपालकों की आम गलतियां क्या हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है, इसे लेकर देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने जानकारी दी है.

क्या कहती हैं पशु चिकित्सक
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थापित पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बरसात के मौसम में गाय और भैंस के दूध में कमी आने के कई कारण हो सकते हैं. बारिश के दौरान बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं. इससे पशुओं के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि जिन पशुपालकों ने बरसात से पहले अपने पशुओं का टीकाकरण करा लिया है, उनके पशुओं में बीमारी का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है. बारिश के मौसम में हरे चारे में नमी बढ़ जाती है. उसमें कीटाणु भी पनप सकते हैं. ऐसा चारा खाने से पशु बीमार हो सकता है. इसका असर दूध उत्पादन पर भी पड़ सकता है.

खुर में भी कई तरह की बीमारी
गोहाल में कीचड़ रहने से पशुओं के खुर में भी कई तरह की बीमारी हो सकती है. इससे बचने के लिए पशुपालकों को गोहाल की साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए. डॉ. पूनम सोरेन के अनुसार, हर रोज गोहाल में चूने का छिड़काव करना उपयोगी हो सकता है. उन्होंने हरे चारे को सीधे पशुओं को खिलाने के बजाय पहले धूप में सुखाने की सलाह दी. इसके बाद ही उसे पशुओं को खिलाना चाहिए. ज्यादा फफूंद लगा या बहुत गीला चारा नहीं देना चाहिए. डॉ. पूनम सोरेन ने सप्ताह में तीन दिन नीम की पत्ती, अजवाइन और लहसुन आदि देने की भी सलाह दी. इसके साथ ही बारिश के मौसम में गाय, भैंस और बकरी जैसे पशुओं को पशु चिकित्सक की सलाह से उचित कृमिनाशक दवा देने की बात कही.

टीकाकरण को न करें नजर अंदाज
पशुपालकों को बारिश के मौसम में टीकाकरण को भी गंभीरता से लेना चाहिए. बीमारी होने के बाद इलाज कराने से बेहतर है कि समय रहते पशुओं को जरूरी टीके लगवा दिए जाएं. इससे कई बीमारियों से बचाव में मदद मिल सकती है. अगर किसी पशु का दूध अचानक कम हो जाए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. पशु खाना छोड़ दे या लगातार सुस्त दिखाई दे, तब भी सावधान रहने की जरूरत है. चलने में परेशानी हो या खुर में घाव दिखाई दे तो भी ध्यान देना चाहिए. इसके अलावा शरीर में कोई असामान्य लक्षण नजर आए तो लंबे समय तक घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. ऐसे लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करना ज्यादा सुरक्षित है.

कृमिनाशक दवा भी जरूरी
बरसात का मौसम पशुपालकों के लिए कमाई के लिहाज से अहम होता है. इसी समय पशुओं की सेहत पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत भी रहती है. पशु स्वस्थ रहेगा तो दूध उत्पादन बेहतर रह सकता है. साथ ही इलाज पर होने वाला अनावश्यक खर्च भी कम किया जा सकता है. इसलिए बारिश में पशुओं को सिर्फ भरपूर चारा देना ही पर्याप्त नहीं है. चारा साफ और उचित स्थिति में है या नहीं, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है. गोहाल में पानी और कीचड़ जमा न हो, इसका ध्यान रखना चाहिए. पशुओं का टीकाकरण समय पर होना चाहिए. साथ ही पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार कृमिनाशक दवा भी देनी चाहिए. पशुपालक थोड़ी सी सावधानी रखकर बरसात में पशुओं को कई परेशानियों से बचा सकते हैं.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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