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Sugar Price : सरकार ने देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसके लिए कारोबारियों की स्टॉक लिमिट तय की गई है. साथ ही बाहर से चीनी आयात करने का भी प्लान है. इतना ही नहीं, सरकार इस बार पेराई सत्र जल्दी शुरू करने की भी तैयारी कर रही है.
देश में चीनी का उत्पादन कम होने से कीमतों में उछाल दिख रहा है.
नई दिल्ली. देश के कई शहरों में चीनी के भाव 70 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गए हैं. अब चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. पिछले एक महीने में चीनी के औसत दाम करीब 48.18 से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. सरकार का कहना है कि त्योहारों के सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.
सरकार ने साफ किया है कि चीनी के दाम बढ़ने की वजह एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ना नहीं है. एथनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12% से घटकर 2025-26 में 9% रह गई है. सरकार के मुताबिक, इस बार चीनी का उत्पादन अनुमान से कम रहा है. गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी, ज्यादा बारिश और जलभराव से नुकसान हुआ है. इसके साथ ही त्योहारों से पहले मांग बढ़ी है और कुछ जगहों पर जमाखोरी व सट्टेबाजी ने भी कीमतों पर असर डाला है.
अनुमान से कम रहा उत्पादन
इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि राज्यों ने शुरुआत में करीब 343 LMT उत्पादन का अनुमान लगाया था. सरकार का कहना है कि देश में इतना चीनी स्टॉक मौजूद है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है. हालांकि, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया में भी चीनी की सप्लाई प्रभावित हुई है. 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 LMT चीनी की कमी का अनुमान है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई है. इसका मतलब है कि दो महीने में ही कीमत में 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
एथनॉल से किसानों और चीनी मिलों को फायदा
सरकार के मुताबिक, भारत में सामान्य तौर पर हर साल 320-340 LMT चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 LMT है. ज्यादा उत्पादन होने पर चीनी का स्टॉक बढ़ जाता है और मिलों का पैसा फंस जाता है, जिससे किसानों को गन्ने का भुगतान भी प्रभावित हो सकता है. ऐसे में अतिरिक्त चीनी से एथेनॉल बनाने की नीति से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. इसका असर यह है कि 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 सीजन के गन्ना बकाये का 97% भुगतान किसानों को किया जा चुका है.
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के बड़े कदम
- 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की गई है.
- 1 सितंबर से बड़े खरीदार 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी स्टॉक नहीं रख सकेंगे.
- केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच कर रही हैं.
- घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 LMT कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है.
- राज्यों और चीनी मिलों से 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने के लिए कहा गया है.
- सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 LMT से बढ़कर 10 LMT से ज्यादा हो सकता है.
- सरकार उपभोक्ताओं और गन्ना किसानों दोनों के हितों का ध्यान रखेगी और चीनी के दाम, स्टॉक और बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी.
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रवि सिंह News18 India में Senior Special Correspondent हैं और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दो दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पिछले 21 वर्षों से वे राष्ट्रीय राजनीति, शासन और नीति निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों …
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