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कृषक समूह बनाकर वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ा रहे आमदनी, नीति आयोग और...




सिमडेगा के ठेठईटांगर में किसानों ने खेती को सिर्फ जीविका का साधन नहीं, बल्कि आय बढ़ाने के संगठित कारोबार का जरिया बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ठेठईटांगर फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़े 1182 किसान अब पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण बीज, बेहतर फसल प्रबंधन, बाजार से सीधे जुड़ाव ने किसानों के लिए कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी की नई संभावना पैदा की है। राज्य के कृषि सचिव, पूर्व में सिमडेगा डीसी रहे अबू बकर सिद्दीक ने भास्कर को बताया कि किसानों के इस प्रयास की नीति आयोग और कृषि मंत्रालय ने भी सराहना की है। उन्होंने इसे ग्रामीण भारत में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी उदाहरण बताया है। एक खेत में दो फसल, मेढ़-नाली से बेहतर उत्पादन किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनमें इंटरक्रॉपिंग प्रमुख है। इसके तहत एक ही खेत में एक साथ दो फसलों की खेती की जा रही है। इससे उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग हो रहा है। रिज एंड फरो यानी मेढ़ और नाली विधि से खेत तैयार करने पर पानी का बेहतर प्रबंधन होता है। इससे फसल की वृद्धि में मदद मिलती है। इसके अलावा इंटरकल्चरल ऑपरेशन्स के माध्यम से खरपतवार नियंत्रण किया जा रहा है। फसलों की नियमित देखभाल भी हो रही है। संगठित किसान, आत्मनिर्भर गांव की ओर कदम : ठेठईटांगर एफपीओ का मॉडल यह दिखाता है कि छोटे और सीमांत किसान यदि संगठन, तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, बाजार से जुड़ जाएं तो खेती की तस्वीर बदली जा सकती है। 1182 किसानों की सामूहिक भागीदारी से तैयार यह पहल सिमडेगा के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रही है।



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