रांची. झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बाद अब पुलिस ने संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ भी आर-पार की कार्रवाई शुरू कर दी है. पुलिस का फोकस सिर्फ अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क और आर्थिक साम्राज्य को खत्म करने पर है. पुलिस अपराधियों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और उनके सहयोगियों की जानकारी जुटा रही है. इसके लिए एटीएस, विशेष टीमों और सभी जिलों के एसपी को अभियान से जोड़ा गया है. मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 तक संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास से 63 हथियार और 274 कारतूस बरामद किए गए हैं, जबकि 50 अपराधियों के खिलाफ CCA के तहत कार्रवाई की गई है.
अपराधियों के पूरे नेटवर्क पर नजर
झारखंड पुलिस अब संगठित अपराध के खिलाफ केवल किसी वारदात के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसके पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है. पुलिस का लक्ष्य यह पता लगाना है कि किसी आपराधिक गिरोह को चलाने वाले लोग कौन हैं, उनके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हैं और अपराध से होने वाली कमाई का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है. इसके लिए एटीएस, विशेष पुलिस टीमों और जिलों के एसपी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है. अलग-अलग स्तर पर जुटाई जा रही सूचनाओं को एक साथ जोड़कर अपराधियों के नेटवर्क की पूरी तस्वीर तैयार की जा रही है.
अपराध से कमाई का हिसाब तलाश रही पुलिस
संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की रणनीति में सबसे अहम हिस्सा अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को खंगालना है. पुलिस संगठित अपराध से जुड़े अपराधियों की चल और अचल संपत्ति का ब्योरा जुटा रही है. इसके साथ ही उनके बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और वित्तीय नेटवर्क की भी जानकारी एकत्र की जा रही है. जांच का मकसद यह पता लगाना है कि अपराध से अर्जित पैसा कहां से आता है, किसके जरिए घूमता है और आखिर में कहां खपाया जाता है. यानी पुलिस अब अपराधी तक पहुंचने के साथ-साथ उसके पैसे के रास्ते को भी तलाश रही है.
मददगारों की भी तैयार हो रही कुंडली
संगठित अपराध का नेटवर्क केवल अपराधियों तक सीमित नहीं होता. पुलिस ऐसे लोगों की भी पहचान कर रही है, जो सीधे अपराध में शामिल नहीं होने के बावजूद गिरोह को किसी न किसी रूप में मदद पहुंचाते हैं. इनमें आर्थिक सहायता देने वाले, लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराने वाले, अपराधियों को ठिकाना देने वाले या किसी दूसरे माध्यम से सहयोग करने वाले लोग शामिल हो सकते हैं. पुलिस ऐसे संदिग्ध सहयोगियों की भूमिका और आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंधों की जानकारी भी जुटा रही है.
जनवरी से जुलाई तक 193 गिरफ्तार
झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से जुलाई 2026 तक संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 63 हथियार और 274 कारतूस बरामद किए हैं. इसके अलावा संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े 50 अपराधियों के खिलाफ CCA के तहत कार्रवाई की गई है. पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है.
अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार
संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस ने अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है. इसमें अपराधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को एक जगह एकत्र किया जा रहा है. इस डेटाबेस में अपराधियों के साथ उनके सहयोगियों, संपत्ति, बैंक खातों और आपराधिक नेटवर्क से संबंधित सूचनाओं को शामिल किया जा रहा है. इसका उद्देश्य अलग-अलग जिलों और पुलिस इकाइयों के पास मौजूद सूचनाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर कार्रवाई को तेज और प्रभावी बनाना है.
अमन साहू गैंग से जुड़े अपराधी सबसे ज्यादा
पुलिस की तैयार की जा रही डिजिटल जानकारी में अलग-अलग संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े अपराधियों का डेटा भी शामिल किया जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इनमें सबसे ज्यादा अपराधी अमन साहू गिरोह से जुड़े पाए गए हैं. पुलिस अब ऐसे गिरोहों के सदस्यों और उनके सहयोगियों के नेटवर्क को अलग-अलग स्तर पर चिन्हित कर रही है. मकसद गिरोह के सक्रिय सदस्यों तक पहुंचने के साथ उसके आर्थिक और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम को भी कमजोर करना है.
एक जगह जुटेगा अपराध का पूरा नेटवर्क
पुलिस संगठित अपराध से जुड़े मामलों की सूचनाओं को एक जगह एकत्र करने के लिए ऑनलाइन डेटाबेस को भी विकसित कर रही है. इसमें अपराधियों के अलावा उनके सहयोगियों, संपत्ति, बैंक खातों और आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाई जा रही हैं.यानी झारखंड पुलिस की रणनीति अब अपराधी पकड़ो और मामला खत्म करो तक सीमित नहीं है. कोशिश अपराधी, उसके सहयोगी, पैसा, संपत्ति और नेटवर्क तक पहुंचने की है. नक्सल अभियान के बाद संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की यह रणनीति आने वाले दिनों में गैंगवार, रंगदारी और दूसरे संगठित अपराधों पर कितना असर डालती है, यह देखने वाली बात होगी.