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Bank Merger : पीएम मोदी की सलाहकार परिषद ने एक बार फिर सुझाव दिया है कि छोटे बैंकों का विलय करके कुछ बड़े बैंक बनाए जाएं. परिषद ने कहा है कि मर्जर भले ही देश के बैंकिंग सिस्टम के लिए जरूरी हों, लेकिन इससे बाजार की प्रतिस्पर्धा कम नहीं होनी चाहिए.
सरकार ने एक बार फिर बैंकों विलय की तैयारी शुरू कर दी है.
नई दिल्ली. देश में बड़े सरकारी बैंक बनाने के लिए छोटे बैंकों के विलय का काम एक बार फिर बढ़ने वाला है. पिछले 7 साल में मोदी सरकार 15 छोटे सरकारी बैंकों को मर्ज कर दिया है. अब एक बार फिर प्रधानमंत्री को सलाह देने वाली संस्था ने बैंकों विलय का सुझाव दिया है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने कहा है कि ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा के लिए भारत में भी बड़े बैंक बनाने पर काम करना होगा. हालांकि, यह विलय इस तरह होना चाहिए कि बैंकिंग क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा पर कोई असर न पड़े और बड़े आकार के बैंक भी बनाए जा सकें.
ईएसी-पीएम ने अपनी रिसर्च में बताया है कि बैंकों के एकीकरण से साल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में बढ़ रही अर्थव्यवस्था की बढ़ती कर्ज जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों पर केंद्रित रिसर्च पेपर में कहा गया है कि भारतीय बैंकिंग उद्योग का आकार कम होने के साथ बैंकों की बाजार हिस्सेदारी में काफी अंतर है. यह 20 फीसदी से लेकर एक फीसदी या उससे भी कम है. अब छोटे बैंकों के विलय का प्रयास किया जाना चाहिए.
पहले कितने बैंकों का विलय
रिसर्च पेपर में कहा गया है कि बैंक एकीकरण का उद्देश्य मजबूत पूंजी आधार, व्यापक भौगोलिक पहुंच और बड़ी परियोजनाओं को वित्तपोषित करने की अधिक क्षमता वाले संस्थान बनाना है. साल 2017 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सहयोगी बैंकों का विलय और साल 2019 में बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ विजया बैंक और देना बैंक का विलय होने के बाद साल 2020 में 10 सरकारी बैंकों के विलय से यह संख्या 27 से घटकर 12 रह गई है.
विलय के बाद क्या फायदा
ईएसी-पीएम ने कहा कि एकीकरण के इन प्रयासों से बैंकों को बड़े स्तर और परिचालन में तालमेल की संभावनाएं मिलीं, लेकिन इसका पूरा लाभ प्रौद्योगिकी के सफल एकीकरण, जोखिम संस्कृति में सामंजस्य और उत्पादकता में निरंतर सुधार पर निर्भर रहा. बैंकिंग क्षेत्र की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रयास सफल रहे हैं. हालांकि, कमजोर बैंकों के अधिग्रहण से उन्हें अपने में मिलाने वाले बैंकों की दक्षता और उत्पादकता पर असर पड़ा है. वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान 47 बैंकों के प्रदर्शन को इस अध्ययन में शामिल किया गया और उनकी दक्षता एवं उत्पादकता का आकलन करने के लिए ‘डेटा एनवलपमेंट एनालिसिस’ (डीईए) पद्धति का इस्तेमाल किया गया.
बैंकों की क्षमता बढ़ी या घटी
रिसर्च में बताया गया है कि बैंकों की औसत तकनीकी दक्षता वित्तवर्ष 2019-20 के 77.99 फीसदी से बढ़कर वित्तवर्ष 2025-26 में 88.34 फीसदी हो गई. वित्तवर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों की दक्षता 93.12 फीसदी रही, जबकि निजी बैंकों की दक्षता 86.02 फीसदी थी. वहीं, विदेशी बैंकों की दक्षता वित्तवर्ष 2019-20 से 2025-26 के दौरान 83-85 फीसदी के बीच रही है. ईएसी-पीएम ने कहा कि भविष्य में बैंकिंग क्षेत्र में कृत्रिम मेधा (एआई) के साथ डिजिटलीकरण से दक्षता बढ़ेगी. इससे युवा ग्राहकों की जरूरत के अनुरूप सेवाओं का अधिक निजीकरण होगा और बैंकिंग सेवाएं प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय रुख की ओर बढ़ेंगी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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