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पद्मा श्री और संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित, मुकुंद नायक ने नागपुरी...


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पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित मुकुंद नायक ने नागपुरी लोक संगीत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. गरीबी और अभावों के बीच 5 वर्ष की उम्र से संगीत सीखा. उन्होंने हजारों गीत लिखे और दर्जन भर देशों में प्रस्तुतियां दीं. नागपुरी भाषा के लिए उन्होंने काफी काम किए.

पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित मुकुंद नायक ने नागपुरी गानों से अपनी खास पहचान बनाई. वे बताते हैं कि उनके माता-पिता किसान थे. बचपन में पिताजी उन्हें मेले ले जाते थे, जहां वे लोगों को नागपुरी गाने गाते देख संगीत से जुड़े. उनके पिता भी गाना गाते थे.

मुकुंद बताते हैं कि बचपन से ऐसा माहौल मिलने के कारण मेरी नागपुरी गानों में दिलचस्पी जगी. मैंने 5 साल की उम्र से ही गाना-बजाना शुरू कर दिया था. बचपन गरीबी और अभावों में बीता, यहां तक कि कई सालों तक जूते तक नसीब नहीं हुए. इसके बावजूद, माता-पिता से संगीत की समृद्ध विरासत और बहुत अच्छे संस्कार मिले.

रांची से सटे सिमडेगा जिले के बोकबा गांव में 1949 में जन्मे मुकुंद नायक प्रसिद्ध लोक गायक और नर्तक हैं. उन्होंने हजारों गीत लिखे हैं. उनकी शिक्षा सिमडेगा, चाईबासा और देवघर में हुई. वह लगभग एक दर्जन देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं. मुकुंद नायक झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से सेवानिवृत्त हैं.

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उन्हें पद्मश्री के अलावा झारखंड गौरव सम्मान, झारखंड रत्न और सांस्कृतिक सम्मान से नवाजा जा चुका है. 2019 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला. मुकुंद नायक नागपुरी भाषा को आत्मा की अभिव्यक्ति मानते हैं. वे बताते हैं कि एक दौर ऐसा भी था जब लोग नागपुरी भाषा को हेय दृष्टि से देखते थे और बोलने वालों का मजाक उड़ाते थे.

आज नागपुरी भाषा में एक से बढ़कर एक गीत और रचनाएं लिखी जा रही हैं. समाज में इस भाषा को मान-सम्मान और प्रतिष्ठा मिली है. इसी भाषा की बदौलत मुझे इतने पुरस्कार मिले. दिल से निकलने वाली भाषा ही आत्मा की भाषा होती है और नागपुरी हमारी वही भाषा है. मेरा हमेशा से यही सपना था कि इसे समाज में सम्मान मिले.

मुकुंद नायक बताते हैं कि बचपन में परिवार के लोग भी संगीतकार थे. इसी कारण बचपन से ही उनकी संगीत में रुचि और समझ विकसित हुई. उन्होंने अपने पिताजी को भी गाते देखा. उनका बचपन भले ही अभावों में बीता, लेकिन पिता ने घर का माहौल हमेशा सकारात्मक रखा और संगीत को ही आनंद का माध्यम बनाया.



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