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शादी और पूजा के सीजन में जरबेरा फूल की मांग बढ़ गई है. पलामू के किसान इसकी खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं. सरकार इस पर 80 फीसदी तक अनुदान दे रही है. कम जमीन में यह खेती रोजाना नियमित आय देती है. पारंपरिक फसलों के मुकाबले इसमें अधिक मुनाफा है.
पलामूः बदलते दौर में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ फूलों की खेती को भी आमदनी का बेहतर जरिया बना रहे हैं. जहां कम जमीन में बेहतर मुनाफा देने वाली फसलों की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है. पलामू में भी किसान संरक्षित खेती के तहत जरबेरा फूल की खेती कर अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं. खास बात यह है कि नए सत्र में जरबेरा की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जा रहा है. इससे किसानों के लिए फूलों की खेती करना पहले की अपेक्षा आसान हो गया है.
80 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान
उद्यान विभाग की इस योजना से फूलों की खेती के लिए पलामू में सात यूनिट का लक्ष्य आया है. उद्यान विभाग के अधिकारी सावन कुमार ने बताया कि राज्य सरकार की इस योजना में एक यूनिट की लागत करीब 6 लाख 60 हजार रुपये निर्धारित है. इसमें किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान राज्य सरकार की ओर से दिया जाता है, जबकि 20 प्रतिशत राशि किसान को स्वयं वहन करनी होती है. यह योजना संरक्षित फूलों की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है.
वहीं, किसान शंकर मेहता वर्षों से पारंपरिक खेती करते आ रहे हैं. अब उन्होंने खेती के तौर-तरीकों में बदलाव करते हुए जरबेरा फूल की खेती शुरू की है. उनका कहना है कि धान और गेहूं की तुलना में जरबेरा की खेती से अधिक आमदनी हो रही है. उनके खेत से रोजाना करीब 300 से 400 फूल निकलते हैं, जिन्हें मेदिनीनगर समेत आसपास के बाजारों में भेजा जाता है.
जान लें फूल की कीमत
शंकर मेहता ने बताया कि बाजार में एक जरबेरा फूल की कीमत करीब 8 से 10 रुपये प्रति पीस तक मिल जाती है. इस तरह रोजाना बड़ी संख्या में फूलों की बिक्री से नियमित आमदनी होती है. चार महीने की अवधि में करीब एक लाख रुपये तक की आमदनी होने की संभावना रहती है. शादी-विवाह, पूजा-पाठ और अन्य आयोजनों में फूलों की मांग रहने के कारण इसकी बिक्री का बाजार भी बना हुआ है.
आगे कहा कि जरबेरा की खेती में शुरुआत में संरचना तैयार करने और पौधों की व्यवस्था में लागत आती है, लेकिन सरकारी अनुदान मिलने से किसानों पर आर्थिक बोझ कम होता है. यही वजह है कि पलामू में अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ फूलों की खेती को भी आय बढ़ाने के विकल्प के तौर पर अपना रहे हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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