नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उपजे विवादों के बाद केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में बड़ा फेरबदल किया है. सरकार ने परीक्षा सिस्टम की साख बचाने और गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए चार वरिष्ठ अधिकारियों की नई तैनाती की है. उच्च शिक्षा विभाग के तहत आईआरएस अधिकारी अंशुमान शर्मा को एनटीए का नया ज्वाइंट सेक्रेटरी बनाया गया है. अंशुमान शर्मा के साथ ही एजेंसी में दो नए डायरेक्टर और एक ज्वाइंट डायरेक्टर की भी नियुक्ति हुई है. कार्मिक मंत्रालय ने सभी नए अफसरों को तीन हफ्ते के भीतर अपना पद संभालने का सख्त निर्देश दिया है. इसके साथ ही सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए सीधे जनता से राय मांगने की बड़ी पहल शुरू की है.
किन दिग्गज अफसरों को सौंपी गई है NTA की कमान?
सरकार ने परीक्षा संचालन को दुरुस्त करने के लिए अलग-अलग सिविल सेवाओं के अनुभवी अफसरों पर भरोसा जताया है. आईआरएस अधिकारी अंशुमान शर्मा को पांच साल या अगले आदेश तक के लिए ज्वाइंट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है. शुरुआती आदेश के तहत वह दो साल तक एनटीए में अपनी सेवाएं देंगे.
इसके अलावा आईपीएस अधिकारी रवि कुमार सिंह और आईएएस अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी को एनटीए में डायरेक्टर का पद सौंपा गया है. वहीं 2016 बैच के आईआरएस अधिकारी अमित समदरिया को ज्वाइंट डायरेक्टर की अहम जिम्मेदारी दी गई है. इन अफसरों की तैनाती का मकसद देश भर के एग्जाम सेंटर्स पर मॉनिटरिंग को बेहद सख्त बनाना और व्यवस्था को चुस्त करना है.
परीक्षा सुधार के लिए आप 13 सितंबर तक सुझाव कैसे दे सकते हैं?
एनटीए ने परीक्षा प्रणाली में बुनियादी बदलाव लाने के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है. यह कमेटी देश के छात्रों, अभिभावकों, टीचर्स और आम नागरिकों से खुलकर सुझाव मांग रही है. सरकार का मानना है कि परीक्षा सुधार की इस मुहिम में हर नागरिक की राय बेहद जरूरी है.
अगर आपके पास परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ बनाने का कोई आइडिया है, तो आप 13 सितंबर 2026 तक अपने विचार भेज सकते हैं. यह सुझाव व्हाट्सएप, आधिकारिक वेबसाइट, टोल-फ्री नंबर या ईमेल के जरिए भेजे जा सकते हैं. सरकार ने साफ किया है कि सुझाव हिंदी, अंग्रेजी या किसी भी क्षेत्रीय भाषा में दिए जा सकते हैं.
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
बीते दिनों नीट-यूजी समेत कई प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे थे. इन विवादों ने लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई थी. इसके बाद से ही पूरी परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल बदलाव की मांग तेजी से उठ रही थी.
सरकार ने अफसरों की नई टीम उतारने के साथ जनता की सीधी भागीदारी का रास्ता चुना है. इसका असली मकसद परीक्षा संचालन की हर तकनीकी और प्रशासनिक खामी को जड़ से खत्म करना है. इन नए कदमों से प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता एक बार फिर मजबूत होगी.