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झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ जिले में डेमोग्राफी में हो रहे बदलाव को लेकर चिंता जतायी है। अपने दो दिवसीय पाकुड़ दौरे के दौरान उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2001 से 2011 के बीच जिले में आदिवासी आबादी के प्रतिशत में कमी आयी है, जबकि मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा है। मरांडी ने इस बदलाव के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जिले की बदलती जनसांख्यिकी गंभीर विषय है और इसकी वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का काम चल रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग को खतियान की जांच करानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जिले में आबादी में बदलाव किस तरह और किन कारणों से हुआ है। गलत वंशावली बनाकर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का आरोप बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि गलत तरीके से वंशावली तैयार कर लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े गये हैं। उन्होंने कहा कि संथाल परगना टेंडेंसी एक्ट के तहत इस क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर विशेष प्रावधान लागू हैं। ऐसे में खतियान की जांच करने पर डेमोग्राफी में बदलाव से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। मरांडी ने सरकार से मामले में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाते हुए कहा कि पाकुड़ जिले में बांग्लादेशी घुसपैठ हुई है और दूसरे राज्यों से भी लोग आकर यहां बसे हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को केवल राजनीतिक नजरिये से नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक और कानूनी विषय के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, पुराने जमीन संबंधी रिकॉर्ड और वर्तमान मतदाता सूची की जांच से स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। राज्य दौरे के बाद तस्वीर साफ होने की उम्मीद उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने झारखंड में डेमोग्राफी बदलाव के मामले को लेकर एक समिति का गठन किया है। यह समिति जल्द ही राज्य का दौरा करेगी। उन्होंने उम्मीद जतायी कि समिति के दौरे और जांच के बाद राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़ा पूरा मामला सामने आयेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को भी इस विषय पर गंभीरता से कदम उठाना चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने पाकुड़ में आबादी के स्वरूप में हो रहे बदलाव को लेकर अपने आरोपों को दोहराया और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जरूरत बतायी। खतियान समेत अन्य सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही वास्तविक स्थिति का विस्तृत आकलन किया जा सकता है। राज्य के हित में खनिज संशोधन बिल खनिज संशोधन बिल को लेकर भी बाबूलाल मरांडी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह बिल पूरे देश के लिए है और इससे झारखंड को भी लाभ होगा। उन्होंने बिल के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया। मरांडी के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि राज्य सरकारों की ओर से लगाये जाने वाले टैक्स के कारण खनिज संपदा की दरें बढ़ती हैं। इससे कोयला और लौह अयस्क जैसी खनिज वस्तुएं महंगी हो जाती हैं और कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य खनिज क्षेत्र से जुड़े व्यापक हितों को ध्यान में रखना है। प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता दिनेश मरांडी, जिला अध्यक्ष सरिता मुर्मू, दुर्गा मरांडी समेत भाजपा के कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद थे।
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