भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

‘हिन्‍दू सबका सम्‍मान और सबको स्‍वीकार करते हैं’, RSS चीफ मोहन भागवत...


होमताजा खबरदेश

‘हिन्‍दू सबका सम्‍मान और सबको स्‍वीकार करते हैं’, कनाडा में बोले मोहन भागवत

Last Updated:

Mohan Bhagwat In Canada: राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के बाद कनाडा पहुंचे हैं. वहां उन्‍होंने टोरंटो में आयोजित एक कार्यक्रम में हिन्‍दुओं को लेकर बड़ी बात कही है. इस मौके पर उन्‍होंने मुस्लिम, ईसाई और यहूदियों का भी उल्‍लेख किया है.

'हिन्‍दू सबका सम्‍मान और सबको स्‍वीकार करते हैं', कनाडा में बोले मोहन भागवतZoom

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के बाद कनाडा पहुंचे हैं.

Mohan Bhagwat In Canada: मोहन भागवत अमेरिका के बाद अब कनाडा पहुंचे हैं. वहां उन्‍होंने टोरंटो में ‘हिन्‍दू विश्‍व बंधु – एम्‍ब्रेस द वर्ल्‍ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया. राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हिन्‍दू सबका सम्‍मान करते हैं, सबको स्‍वीकार करते हैं. इससे पहले RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि मुसलमानों को भारत से निकालना हिंदुत्‍व नहीं है. उन्‍होंने कहा था कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है. उन्होंने हिंदू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इसे किसी एक भाषा, पूजा-पद्धति या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार विविधताओं के बावजूद हिंदू सभी का सम्मान और सभी को स्वीकार करते हैं. भागवत ने कहा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से उत्पीड़ित लोगों को शरण दी और विभिन्न समुदाय आज भी अपनी विशिष्टताओं के साथ भारत में रहते हैं. इस मौके पर उन्‍होंने मुस्लिम, ईसाई और यहूदियों का भी जिक्र किया.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु – एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम में भारत की सभ्यतागत सोच और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया पर विजय हासिल करने के बजाय ज्ञान, मूल्यों और सेवा के जरिए अपना प्रभाव स्थापित किया और इसी चरित्र के कारण उसे ‘विश्वगुरु’ कहा गया. आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान से संपन्न लोग ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को स्वीकार करते हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है. उन्होंने कहा कि इंसानों के शरीर, आकार और रंग अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मूल रूप से सभी एक हैं. इसलिए दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है. उनके मुताबिक यही ज्ञान मनुष्य को स्थायी खुशी और संतोष की ओर ले जाता है.





Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top