गाजीपुरः उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रामलीला अपनी चार सौ साल पुरानी ऐतिहासिक परंपरा और अनूठी शैली के लिए पूरे देश में जानी जाती है. इस ऐतिहासिक मंचन की सबसे बड़ी खूबसूरती वे कलाकार हैं, जो सिर्फ किरदार नहीं निभाते, बल्कि खुद को उस पात्र में पूरी तरह ढाल लेते हैं. इस बार गाजीपुर की इस ऐतिहासिक रामलीला के तीन मुख्य किरदारों भगवान राम का किरदार निभाने वाले रौनक तिवारी, लंकापति रावण का किरदार निभाने वाले राजा भैया तिवारी और माता सीता का किरदार निभाने वाले राज तिवारी से खास बातचीत की गई, जिसमें उनके अनछुए अनुभव और संघर्ष सामने आए.
रौनक तिवारी: राम का किरदार और असल जिंदगी की मर्यादा
भगवान राम की भूमिका निभाने वाले रौनक तिवारी महज 12 से 14 वर्ष की उम्र के युवा कलाकार हैं, लेकिन मंच पर उनकी परिपक्वता देखते ही बनती है.पिछले तीन साल से लगातार राम का किरदार निभा रहे रौनक बताते हैं कि इस अभिनय को जीवंत बनाने के लिए उनके गुरु उन्हें विशेष रूप से श्लोक सिखाते हैं, जिनका वे मंच पर पूरी तल्लीनता से पाठ करते हैं. रौनक का कहना है कि भगवान राम सत्य और मर्यादा के प्रतीक हैं, इसलिए वे निजी जीवन में भी पूरी तरह मर्यादा में रहने की कोशिश करते हैं. उनका अनुभव है कि लोग कई बार मंच से उतरने के बाद भी उन्हें असल जिंदगी में ‘राम जी’ मानकर सम्मान देने लगते हैं, जिससे उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. शुरुआत में यह किरदार निभाना थोड़ा कठिन जरूर लगा था, लेकिन अब अभ्यास के कारण सब कुछ सहज हो गया है.
25-30 साल का सफर, रावण की गूंजती हंसी और बहुमुखी अभिनय
पिछले 25 से 30 सालों से रावण का किरदार निभा रहे राजा भैया तिवारी इस रामलीला के सबसे अनुभवी और चर्चित चेहरों में से एक हैं. रावण के अलावा वे जरूरत पड़ने पर मंथरा, परशुराम और शबरी जैसे चुनौतीपूर्ण किरदार भी बखूबी निभा चुके हैं. उनका मानना है कि मंच पर भले ही वे अहंकारी लंकापति का किरदार निभाते हैं, लेकिन अंदर से उनकी पूरी आस्था भगवान राम के प्रति ही है. रावण के किरदार की मूल आत्मा उसके अहंकार का अंत है, जिसे वह मंच पर पूरी शिद्दत से जीते हैं.
राजा भैया की आवाज का भारीपन और उनका खास ‘अट्ठाहास’ (रावण की हंसी) इस रामलीला का मुख्य आकर्षण है. वह बताते हैं कि पिछले तीन साल से उनकी रावण वाली हंसी को स्टूडियो में रिकॉर्ड किया जाता है, जिसे दशहरा के आखिरी दिन साउंड सिस्टम पर चलाया जाता है. जब उनकी दहाड़ जैसी गूंजती हुई हंसी (हाँ-हाँ, मैं लंकापति रावण…) पूरे इलाके में गूंजती है, तो पूरा वातावरण जीवंत हो उठता है.
माता सीता का किरदार और ‘राम वनगमन’ का भावुक प्रसंग
पिछले तीन साल से माता सीता के पवित्र किरदार को निभा रहे राज तिवारी (जो उम्र में रौनक से दो-तीन साल छोटे हैं) के लिए यह सफर बेहद खास रहा है. शुरुआत में संवादों और तौर-तरीकों को याद करने में थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी, लेकिन अब अभ्यास के कारण सब आसान हो गया है. राज बताते हैं कि उन्हें रामलीला के दौरान सबसे ज्यादा पसंद आने वाला प्रसंग ‘राम वनगमन’ (जब भगवान राम वन की ओर प्रस्थान करते हैं) का है. इस दृश्य को निभाते समय उनके मन में एक अलग ही आध्यात्मिक और भावुक जुड़ाव महसूस होता है, जो उन्हें अपनी जड़ों और संस्कृति के करीब लाता है.