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डंडई में पशु चिकित्सालय में नियमित डॉक्टर नहीं बैठते, नाराजगी




भास्कर न्यूज | डंडई इंसानों के इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रखंड क्षेत्र में कई डिस्पेंसरी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर किसानों की आजीविका का अहम सहारा माने जाने वाले बेजुबान पशुओं के इलाज की व्यवस्था बदहाल है। डंडई प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में अधिकतर दिन ताला लगा है। ऐसे में बीमार पड़ने वाले गाय, बैल, भैंस, बकरी और सूअर जैसे पालतू पशुओं के इलाज को लेकर पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। प्रखंड के पशुपालक कई किसानों ने बताया कि डंडई प्रखंड क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ पशुपालन पर भी निर्भर हैं। कई परिवारों के लिए मवेशी केवल पशु नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी का महत्वपूर्ण साधन हैं। पशुओं के बीमार पड़ने पर उन्हें इलाज की जरूरत होती है, लेकिन स्थानीय प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय बंद रहने के कारण पशुपालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।ग्रामीणों का कहना है कि डंडई पशु चिकित्सालय में वर्षों से नियमित पशु चिकित्सक की व्यवस्था नहीं रही। चिकित्सालय प्रभार के भरोसे चलता रहा है। लेकिन पिछले कई महीनों से यहां पशु चिकित्सक नहीं आ रहे है । ऐसे में पशुओं के बीमार पड़ने पर पशुपालकों को निजी स्तर पर इलाज की व्यवस्था करनी पड़ती है या फिर दूर-दराज के क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है। सरकार एक ओर पशुपालन को बढ़ावा देने की बात कर रही है। किसानों और पशुपालकों को पशुपालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशु उपलब्ध कराने की पहल भी की जा रही है। लेकिन दूसरी ओर पशुओं के इलाज के लिए सरकारी पशु चिकित्सालय का बंद रहना सरकारी प्रयासों पर सवाल खड़े कर रहा है।पशुपालकों का कहना है कि यदि पशुओं को समय पर इलाज नहीं मिले तो बीमारी गंभीर होने के साथ-साथ पशुओं की जान तक जा सकती है। इससे सीधे तौर पर किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने राज्य के संबंधित विभाग के मंत्री एवं जिला स्तर के अधिकारियों से डंडई पशु चिकित्सालय को नियमित रूप से संचालित कराने तथा स्थायी पशु चिकित्सक की व्यवस्था करने की मांग की है। अब सवाल यह है कि जब सरकार पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है, तो डंडई के बेजुबान पशुओं के इलाज के लिए बंद पड़े अस्पताल का ताला आखिर कब खुलेगा? पशुपालक अब विभागीय अधिकारियों की पहल और चिकित्सालय के दोबारा नियमित संचालन की उम्मीद लगाए बैठे हैं। मामले को लेकर पशुपालन पदाधिकारी श्रीकांत बरबुदे ने कहा कि जिले में प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालयों की संख्या 17 है। जिले भर में मात्र 12 पशु चिकित्सक हैं। 28 पोस्टेड पद है। जिसके वजह से जिले में पशु चिकित्सक की भारी कमी है। यदि पशु चिकित्सालय बंद रह रहा है तो एक पशु चिकित्सक को वहां का प्रभार देकर सप्ताह में दो दिन सेवा देने के लिए निर्देश दिया जाएगा।



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