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भास्कर न्यूज| दुमका गांधी मैदान में शनिवार को आदिवासी-मूलवासी एकता मंच की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), परिसीमन और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026 के विरोध में जनसभा आयोजित की गई। मुख्य वक्ता ग्लैडसन डुंगडुंग ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है। इससे आदिवासी-मूलवासी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर होने का खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी आदिवासी या मूलवासी का नाम सूची से कटने नहीं दिया जाएगा। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर मंच ने पिछले चार महीनों में राज्य में दुष्कर्म की पांच घटनाओं और एक बच्ची की हत्या के मामलों की त्वरित व निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों को सजा देने की मांग की। इसके अलावा छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान, छात्रावासों की मरम्मत और शिक्षा सुविधाओं में सुधार का मुद्दा भी उठाया गया। जनसभा को रस्क हेंब्रम और एहतेशाम अहमद ने भी संबोधित किया। इससे पहले गांधी मैदान से रैली निकाली गई, जो समाहरणालय पहुंची। वहां उपायुक्त को छह सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। इसके बाद रैली वापस गांधी मैदान लौटी और जनसभा में तब्दील हो गई। कार्यक्रम का संचालन सुशील मरांडी, संजय सेबेस्टियन मरांडी और सुनील हेंब्रम ने किया। एसआईआर से ग्रामीण, आदिवासी, प्रवासी, भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। वक्ताओं ने दावा किया कि प्रारूप मतदाता सूची से करीब 41 लाख नाम कथित रूप से गायब थे और 62 लाख तक नाम हटाए जाने की आशंका है। दुमका में भी एक लाख से अधिक नाम गायब होने या हटाए जाने की खबरों पर चिंता जताई गई। मंच ने जिला और निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़े सार्वजनिक करने, प्रभावित मतदाताओं को पात्रता साबित करने का अवसर देने, शिकायत और अपील की सुलभ व्यवस्था बनाने तथा मतदाता सूची से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। परिसीमन पर वक्ताओं ने कहा कि पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों और आदिवासी पहचान को देखते हुए यह संवेदनशील मुद्दा है। सीमा परिवर्तन और सीटों के पुनर्वितरण से आदिवासी प्रतिनिधित्व कमजोर होने की आशंका है। आदिवासी इतिहास, भाषा, संस्कृति और जमीन व संसाधनों से उनके संबंधों को आधार बनाया जाए।
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