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जस्टिस सूर्यकांत ने कहा:न्याय का मतलब जरूरतमंद को हक दिलाना




झारखंड हाईकोर्ट परिसर में अत्याधुनिक डेटा सेंटर का उद्घाटन किया, बोले- तकनीक का मकसद आम लोगों की परेशानी कम करना हो भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट परिसर में करीब 35 करोड़ रुपए की लागत से बने अत्याधुनिक डेटा सेंटर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने कई महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों की भी शुरुआत की। इस अवसर पर सीजेआई ने कहा कि यह न्यायिक व्यवस्था के तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, तकनीक का मकसद सिर्फ आधुनिक सुविधाएं विकसित करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों और न्याय से जुड़े लोगों की परेशानियां कम करना भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति की असली सफलता इस बात से तय होगी कि किसी मुकदमे से जुड़े व्यक्ति को दस्तावेज कितने आसानी से मिलते हैं, वकील को सुनवाई की तैयारी में कितनी सुविधा होती है और न्यायाधीश कितनी प्रभावी तरीके से फैसला दे पाते हैं। तकनीक समय पर न्याय पहुंचाने का माध्यम है। इसका फायदा सीधे आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। डिजिटल रिकॉर्ड और ई-संचार का मजबूत आधार बनेगा डेटा सेंटर सीजेआई ने कहा कि आज न्यायिक कामकाज तेजी से डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक संचार और सूचनाओं की समय पर उपलब्धता पर निर्भर हो रहा है। ऐसे में न्यायिक संस्थानों का तकनीकी ढांचा भी इन जरूरतों के अनुरूप मजबूत होना जरूरी है। डेटा सेंटर भले ही अदालत की तरह आम लोगों को दिखाई नहीं देता हो, लेकिन आधुनिक न्यायिक व्यवस्था के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना है। इसमें कंप्यूटिंग क्षमता, बड़े स्तर पर डेटा संग्रहण, कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए बैकअप जैसी सुविधाएं हैं। ये ई-कोर्ट सेवाओं, डिजिटल दस्तावेजों और अदालतों से जुड़े ऑनलाइन अनुप्रयोगों को सुचारु रूप से चलाने में मदद करेंगी। इससे झारखंड हाईकोर्ट की न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में आसानी होगी। साथ ही न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुलभ, सक्षम और जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी। जानिए…डेटा सेंटर से न्यायिक व्यवस्था में बदलाव देवघर में 1,880 लाभुकों को 14.47 करोड़ की सहायता सीजेआई देवघर सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तिकरण शिविर में शामिल हुए। शिविर में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत 1,880 लाभुकों के बीच 1,446.90 लाख रुपए (करीब 14.47 करोड़) की परिसंपत्तियों और सहायता राशि का वितरण किया गया। पीड़ितों को प्रतिकर राशि भी दी गई। इस दौरान सीजेआई ने वर्चुअल माध्यम से पलामू के भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय और रांची के सरला बिरला विश्वविद्यालय में स्थापित विधिक सहायता क्लिनिक का उद्घाटन किया। डिजिटल रिकॉर्ड और ई-संचार का मजबूत आधार बनेगा डेटा सेंटर सीजेआई ने कहा कि आज न्यायिक कामकाज तेजी से डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक संचार और सूचनाओं की समय पर उपलब्धता पर निर्भर हो रहा है। ऐसे में न्यायिक संस्थानों का तकनीकी ढांचा भी इन जरूरतों के अनुरूप मजबूत होना जरूरी है। डेटा सेंटर भले ही अदालत की तरह आम लोगों को दिखाई नहीं देता हो, लेकिन आधुनिक न्यायिक व्यवस्था के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना है।



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