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Nisha Bhagat Death Case: झारखंड की आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत मौत मामले में अब बड़ा मोड़ आ गया है. निशा भगत के पिता इंदु भगत के आवेदन पर पिठोरिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. आवेदन में दिए गए नामों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई है. मामले की जांच की जिम्मेदारी डीएसपी हेडक्वार्टर 1 अमर कुमार पांडे को दी गई है. पिता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है
निशा भगत आत्महत्या मामले में पिता इंदु भगत के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज
रांची. आदिवासी समाज के हक और जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ने वाली मुखर सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत ने शुक्रवार को पिठोरिया थाना क्षेत्र में फंदे से लटककर अपनी जान दे दी थी. इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब मृतिका के पिता इंदु भगत (आनंदु भगत) ने पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है. उनके लिखित आवेदन के आधार पर पिठोरिया थाने में नामजद आरोपियों और तत्कालीन थाना प्रभारी सहित कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच की कमान डीएसपी हेडक्वार्टर 1 अमर कुमार पांडे को सौंपी गई है.
“मानसिक प्रताड़ना और चरित्र हनन बनी वजह”
निशा भगत के पिता ने अपने आवेदन में बेटी की मौत को एक सुनियोजित षड्यंत्र बताया है. उनका आरोप है कि निशा को लंबे समय से मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. सोशल मीडिया पर लगातार उनका चरित्र हनन किया जा गया, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव में आ गई थीं. नामजद आरोपियों में अजय तिर्की और ज्योत्सना केरकेट्टा समेत अन्य जमीन दलालों पर आवेदन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसके साथ ही पिता ने आवेदन में पिठोरिया के थाना प्रभारी सतीश पाण्डेय सहित अन्य पुलिस पदाधिकारियों पर भी आरोप लगाए हैं जिसकी जांच जारी है. निशा के पिता ने इन नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि इसी प्रताड़ना और अत्यधिक मानसिक दबाव के कारण उनकी बेटी को ऐसा खौफनाक कदम उठाना पड़ा.
सुसाइड से पहले फेसबुक लाइव और सिस्टम पर गंभीर सवाल
निशा भगत ने आत्मघाती कदम उठाने से ठीक पहले फेसबुक पर लगभग 10 मिनट का एक लाइव वीडियो प्रसारित किया था. इस वीडियो में वह काफी भावुक थीं और रोते हुए उन्होंने झारखंड सरकार, भू-माफिया और स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे. निशा ने कहा था कि आदिवासी अधिकारों और जमीन दलालों के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने स्थानीय पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई थी, लेकिन पिठोरिया थाना प्रभारी ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया.
निशा भगत के पिता इंदु भगत दिए गए आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.
डीएसपी अमर कुमार पांडे करेंगे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच
घटना के बाद से ही रांची पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है. मामले की गंभीरता और राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद रांची पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी विस्तृत जांच की जिम्मेदारी डीएसपी हेडक्वार्टर 1 अमर कुमार पांडे को दी है. पुलिस का कहना है कि मृतिका के पिता के आवेदन, फेसबुक लाइव में लगाए गए आरोपों, और सोशल मीडिया के सभी तकनीकी साक्ष्यों को ध्यान में रखकर निष्पक्षता से जांच की जा रही है.
परिजनों और युवाओं ने की सीबीआई जांच की मांग
बता दें कि निशा भगत की असमय मौत से आदिवासी समाज और स्थानीय युवाओं में भारी आक्रोश है. परिजनों और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने राज्य सरकार की जांच पर अविश्वास जताते हुए इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग तेज कर दी है. युवाओं ने नगड़ी चेकपोस्ट के पास सड़क जाम कर न्याय की मांग की है. वहीं, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे और तत्कालीन थाना प्रभारी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है.