गिरिडीह में दीपावली के साथ ही मां काली की आराधना को लेकर उत्साह चरम पर है। शहर के मकतपुर स्थित बंगला स्कूल परिसर में रविंद्र ग्रंथागार काली पूजा समिति की ओर से इस वर्ष भी भव्य आयोजन किया जा रहा है। समिति पिछले 28 वर्षों से लगातार मां काली की पूजा करत
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पूजा को लेकर परिसर में तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। यहां मां काली का आकर्षक दरबार सजाया गया है। पंडाल से लेकर प्रतिमा और विद्युत सज्जा तक हर चीज को खास रूप दिया गया है। आयोजन को लेकर समिति के सदस्यों में खास उत्साह है। वहीं, शहर के श्रद्धालु भी मां के दर्शन और पूजा में शामिल होने का इंतजार कर रहे हैं।

पूजा को लेकर परिसर में तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। यहां मां काली का आकर्षक दरबार सजाया गया है। पंडाल से लेकर प्रतिमा और विद्युत सज्जा तक हर चीज को खास रूप दिया गया है।
दक्षिणेश्वर मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल
इस वर्ष पूजा पंडाल को कोलकाता के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है। पंडाल की बनावट में मंदिर की झलक देखने को मिलेगी। इसकी आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण होगी। वहीं, पूरे परिसर में रंग-बिरंगी लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। शाम होते ही रोशनी से पूजा परिसर जगमगाएगा। विद्युत सज्जा को भी विशेष रूप दिया गया है।
समिति के अध्यक्ष तरुण मुखर्जी ने बताया कि इस बार पंडाल को दक्षिणेश्वर मंदिर जैसा स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि आयोजन में नगर निगम और जिला प्रशासन का हमेशा सहयोग मिलता रहा है। इसके लिए समिति ने दोनों के प्रति आभार जताया है। समिति का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था के बीच मां के दर्शन का अवसर मिले।

समिति के अध्यक्ष तरुण मुखर्जी ने बताया कि इस बार पंडाल को दक्षिणेश्वर मंदिर जैसा स्वरूप देने का प्रयास किया गया है।
बंगाली रीति-रिवाज से होगी मां की पूजा
रविंद्र ग्रंथागार काली पूजा की खास पहचान बंगाली परंपरा और रीति-रिवाज हैं। यहां मां काली की पूजा बंगाली विधि-विधान के अनुसार की जाती है। प्रतिमा का निर्माण बंगाल के कुशल कारीगरों द्वारा कराया जाता है। प्रतिमा की कलात्मकता और भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। पूजा के दौरान पारंपरिक धार्मिक विधियों का पालन किया जाएगा।
समिति के कार्यक्रम के अनुसार, 8 नवंबर को मां काली की विधिवत पूजा-अर्चना होगी। 9 नवंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण भी होगा। इसके बाद 10 नवंबर को मां काली की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

क्षिणेश्वर मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल, बंगाली परंपरा में पूजा और आकर्षक विद्युत सज्जा इस बार के आयोजन को खास बना रहे हैं।
आयोजन को सफल बनाने में जुटे समिति के सदस्य
पूजा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में समिति के सभी सदस्य जुटे हैं। अध्यक्ष तरुण मुखर्जी के साथ अरिंदम बस, वैद्यनाथ पॉल, विश्वनाथ पॉल, संदीप चटर्जी, पार्थो सरकार, बाबू घोष, आयन बनर्जी, प्रणेश दास, डॉ. आलोक रंजन रॉय, सुमित चटर्जी और असीम डे सहित अन्य सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पंडाल निर्माण, सजावट, पूजा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर सदस्य लगातार काम कर रहे हैं। समिति का उद्देश्य 28 वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को नई भव्यता के साथ आगे बढ़ाना है। दक्षिणेश्वर मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल, बंगाली परंपरा में पूजा और आकर्षक विद्युत सज्जा इस बार के आयोजन को खास बना रहे हैं। ऐसे में बंगला स्कूल परिसर की काली पूजा शहरवासियों के लिए आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है।