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सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह और कुकड़ू प्रखंड के किसानों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की दिशा में कदम बढ़ गया है। राज्य सरकार ने चांडिल जलाशय से पानी लिफ्ट कर खेतों तक पहुंचाने वाली ‘नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना’ के लिए 607.0332 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना से 14 पंचायतों की 9336 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी और क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। चांडिल जलाशय के पास होने के बावजूद नीमडीह व कुकड़ू प्रखंडों में खेती अब तक बारिश के भरोसे थी। नियमित सिंचाई सुविधा न होने से किसान केवल खरीफ में धान की खेती तक सिमटे हुए थे और बारिश की बेरुखी पर फसल नुकसान का खतरा बना रहता था। अब मेगा लिफ्ट योजना के तहत जलाशय से पानी पंप कर भूमिगत पाइपलाइन और वितरण नेटवर्क के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाएगा। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के साथ ही योजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही इसके लिए टेंडर जारी किया जाएगा और निर्माण एजेंसी का चयन होते ही जनवरी-फरवरी तक निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त होने के बाद किसान धान के अलावा रबी के मौसम में गेहूं, दलहन, तिलहन और हरी सब्जियों की भरपूर पैदावार कर सकेंगे। साल में दो या उससे अधिक फसलें लेने से किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी, फसल का जोखिम घटेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। धान के बाद अब रबी और सब्जियों की भी होगी बंपर पैदावार लिफ्ट इरिगेशन सिंचाई योजना क्यों… वर्तमान हेमंत सरकार की यह सोच है कि लंबी एवं बड़ी सिंचाई योजनाएं पूर्ण होने में विलंब होता है। तत्काल किसानों तक सिंचाई येाजनाएं पहुंचाने में लिफ्ट इरिगेशन योजनाएं अधिक कारगर होंगी। इसलिए अधिकांश डैम एवं नदी से कैसे पानी लिफ्ट करके खेतों तक पहुंचायी जाए। यह न केवल अधिक कारगर साबित होती है बल्कि कम समय एक टाइम फ्रेम में योजनाएं पूर्ण हो जाती हैं। अभी कैसे हो रही खेती… चांडिल जलाशय के निर्माण के बावजूद आसपास के कई कृषि क्षेत्रों तक नियमित सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच पाता है। नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों में खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर है। बारिश कम होने या समय पर नहीं होने से किसानों को फसल नुकसान का जोखिम उठाना पड़ता है। सिंचाई के अभाव में किसान मुख्य रूप से खरीफ की खेती तक सीमित रह जाते हैं। असर क्या होगा… 9336 हेक्टेयर भूमि पर सालों भर पानी उपलब्ध होगा। किसानों को खेती के लिए अब केवल बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा; वे रबी, दलहन और सब्जी की खेती की तैयारी कर सकेंगे। जमीन अधिग्रहण की बड़ी बाधा के बिना भूमिगत पाइपलाइन से पानी सीधे खेतों तक आएगा। किसान साल में एक के बजाय दो या तीन फसलें ले सकेंगे, जिससे उनकी आय और ग्रामीण रोजगार में बढ़ोतरी होगी। 2-3 माह में काम शुरू कर दिया जाएगा योजना की मंजूरी मिल चुकी है। बहुत जल्द ही अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी करके अगले दो से तीन महीने में इसका काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे खेतों तक कम समय में पानी पहुंच पाएगा।
– हफीजुल हसन, मंत्री, जल संसाधन आगे क्या होगा… जल संसाधन विभाग जल्द टेंडर आमंत्रित करेगा। एजेंसी का चयन पूरा होते ही जनवरी-फरवरी के दौरान पंपिंग स्टेशन और पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू होगा। किसानों को मानसून की अनिश्चितता से मुक्ति मिलेगी। वे बहुफसली खेती अपना सकेंगे। फसल बर्बादी का जोखिम घटेगा, पैदावार बढ़ेगी और स्थानीय कृषि बाजारों में व्यापार तेज होगा। सालों भर खेती होने से कृषि आधारित स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। धान के साथ रबी, दलहन और सब्जियों की खेती का रास्ता परियोजना पूरी होने के बाद सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों को केवल मानसून के भरोसे खेती नहीं करनी पड़ेगी। खरीफ में धान की खेती के अलावा रबी मौसम में गेहूं, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती की संभावनाएं बढ़ेंगी। खेतों में जरूरत के अनुसार पानी मिलने से फसल की उत्पादकता बढ़ाने और फसल नुकसान कम करने में मदद मिलेगी। किसान एक मौसम के बजाय साल में दो या अधिक फसल लेने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। इससे कृषि आधारित रोजगार, स्थानीय बाजार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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