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गढ़वा में पहले एमबीबीएस बैच के 100 में 91 विद्यार्थी सफल, मंदिरों...




भास्कर न्यूज | गढ़वा रामचंद्र चंद्रवंशी ट्रस्ट द्वारा संचालित लक्ष्मी चंद्रवंशी मेडिकल कॉलेज के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब सत्र 2021-26 के पहले एमबीबीएस बैच के 100 में से 91 विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर सफलता हासिल की। अपनी इस उपलब्धि के बाद विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ काली मंदिर एवं गढ़ देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मौके पर रामचंद्र चंद्रवंशी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. ईश्वर सागर चंद्रवंशी, रजिस्ट्रार प्रो. देवाशीष मंडल, डॉ. ओम प्रकाश भारती, भाजपा नेता ओम प्रकाश तिवारी और विनय चौबे आदि लोग उपस्थित थे। कुलाधिपति डॉ. चंद्रवंशी ने इस सफलता को राज्य और विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब इस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस का बैच पास हुआ है, जो क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। दूसरे राज्यों के विद्या​र्थी भी कर रहे पढ़ाई : कुलाधिपति कुलाधिपति ने कहा कि ट्रस्ट अब मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है, जिससे उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा का विस्तार हो सके। उन्होंने बताया कि कॉलेज में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, जो इसकी व्यापक पहचान को दर्शाता है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। मौके पर सफल विद्यार्थियों ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि देश में डॉक्टरों की कमी एक गंभीर समस्या है, जिसके कारण कई मरीज समय पर इलाज न मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि वे सेवा भावना के साथ कार्य करेंगे और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में योगदान देंगे। एक साल राज्य में ही करेंगे इंटर्नशिप उन्होंने जानकारी दी कि सभी सफल विद्यार्थी झारखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराकर राज्य के भीतर ही एक वर्ष की इंटर्नशिप पूरी करेंगे। इसके बाद वे चिकित्सा सेवा देने के लिए अधिकृत होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य ट्रस्ट के चेयरमैन एवं पूर्व मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी का सपना था, जिसमें स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देकर डॉक्टरों की कमी को दूर करना शामिल था।



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