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साईंकृपा संस्था की संस्थापक अंजना रामगोपाल ने ममता और अपनेपन की मिसाल पेश की हैं जिनकी परवरिश और प्यार की बदौलत कई बच्चे आज देश-विदेश में नौकरी कर रहे हैं और अपने पैरों पर खड़े हैं.
नोएडा: मां सिर्फ जन्म देने वाली ही नहीं होती, ममता और अपनापन देने वाली हर महिला मां कहलाने का हक रखती हैं और इस मदर्स डे पर हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी बताएंगे जिन्होंने खुद शादी नहीं की, लेकिन आज सैकड़ों बच्चों की प्ररेणा बनी हैं. कहानी है नोएडा सेक्टर 12 स्थित साईंकृपा संस्था की संस्थापक अंजना रामगोपाल की. जिनकी परवरिश और प्यार की बदौलत कई बच्चे आज देश-विदेश में नौकरी कर रहे हैं और अपने पैरों पर खड़े हैं.
36 साल पहले करी थी संस्था की शुरुआत
बता दें कि अंजना राज गोपाल मूल रूप से केरलम की निवासी है. और उन्होंने करीब 36 साल पहले साई कृपा संस्था की नींव रखी थी, उन्होंने महसूस किया था कि समाज के इन वंचित बच्चों को भी शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए. हालांकि उनके प्रयासों का नतीजा यह है कि आज अंजना रामगोपाल और उनकी संस्था के जरिए दर्जनों युवा और युवतियां शादी कर चुके हैं और देश विदेश में नौकरी भी कर रहे हैं.
संस्था में बच्चे शिक्षित ही नहीं आत्मनिर्भर भी बनते है
वहीं अंजना राजगोपाल ने लोकल18 से बात करते हुए बताया कि इस संस्था का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के समग्र विकास पर भी ध्यान देना हैं. उनका मानना हैं, कि केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्य और आत्मविश्वास भी बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जहां उन्होंने सैकड़ों बच्चों को न केवल शिक्षा दी, बल्कि एक नया जीवन भी दिया हैं. हालांकि अंजना अपने इन बच्चों को खुद की संतान की तरह मानती हैं. उन्होंने अपने जीवन में कभी शादी नहीं की, लेकिन अनाथ बच्चों की मां बनकर उन्हें स्नेह और सुरक्षा जरूर दी हैं. उन्होंने एक ऐसा माहौल तैयार किया हैं, जहां बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिलता हैं. और बच्चों को न केवल पढ़ाई की सुविधा दी जाती हैं, बल्कि उन्हें खेलकूद, कला, संगीत और अन्य गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता हैं.
दर्जनों बच्चों की कराई शादी
वही अंजना राज गोपाल का जीवन उन सभी के लिए प्रेरणा हैं जो समाज सेवा में रुचि रखते हैं. बता दें कि अंजना राजगोपाल ने दर्जनों बच्चों को पाल पोषकर उनकी शादी कराई हैं और कुछ बच्चों को विदेश भी भेजा हैं. इनकी माने तो संस्था में सबसे छोटा बच्चा 2 साल का और सबसे बड़ा 20 से 22 साल का हैं. वही उनका सपना है कि वो बुजुर्गों, और उन बच्चों के लिए भी काम करे जो रेड लाइट पर भीँख मांगते हैं.
अब तक हजारों बच्चो को उनके पेरेंट्स से मिलवा चुकी हैं
अंजना ने बताया कि वह पहले एक मीडिया संस्थान में काम करती थीं. और बचपन से ही अनाथ बच्चों को देखकर उनका मन विचलित हो जाता था. वहीं एक दिन नौकरी से लौटते समय उन्होंने एक विकलांग बच्चे को किसी व्यक्ति द्वारा पीटते देखा, जिसके बाद वह उस बच्चे को अपने साथ ले आईं और उसकी परवरिश की और यही घटना उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बनी और उन्होंने साई कृपा संस्था की शुरुआत कर दी. अंजना का कहना है कि जब भी कोई बच्चा उन्हें मिलता है तो वह सबसे पहले पुलिस की मदद से उसके माता-पिता और परिवार को खोजने की कोशिश करती हैं. और उन्हें उनसे मिलवाने की कोशिश करती हैं. हालांकि अब तक उन्होंने हजारों बच्चों को उनके परिवार से मिलाया हैं.
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