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मनमानी फीस पर प्रशासन सख्त, 92 निजी स्कूलों को फीस में एडजस्ट...




निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने पर प्रशासन सख्त, 92 निजी स्कूलों को फीस में एडजस्ट करनी होगी अधिक ली गई राशि रांची: निजी स्कूलों के मनमानी फीस वसूलने पर अब जिला प्रशासन सख्त हो गया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में री-एडमिशन, एनुअल चार्ज और अन्य मदों में अतिरिक्त फीस लेने वाले स्कूलों को अब यह राशि मासिक शुल्क में एडजस्ट करने का निर्देश दिया गया है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने जिले के सभी निजी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित बैठक में जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पेश की गई। जांच में सामने आया कि पिछले तीन वर्षों के शुल्क वृद्धि विश्लेषण में 129 में से 92 स्कूलों ने नियमों का उल्लंघन किया है। इन स्कूलों के प्राचार्यों को 15 दिनों में फी-एडजस्टमेंट प्लान बनाकर जमा करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में अबुआ पोर्टल पर मिली शिकायतों की समीक्षा हुई। कई अभिभावकों ने मनमानी फीस वृद्धि व री-एडमिशन शुल्क लेने की शिकायत दर्ज कराई थी। 19 स्कूलों ने नहीं बनाया पीटीए जिले के सीबीएसई (CBSE) और आईसीएसई (ICSE) से संचालित 149 स्कूलों में से 130 ने अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) का गठन कर लिया है। शेष 19 स्कूलों पर अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में अनुपस्थित रहने वाले स्कूलों को नोटिस जारी करने और उनका फिजिकल वेरिफिकेशन कराने का निर्देश भी दिया गया। स्कूलों में की गई फीस वृद्धि का विवरण ग्रीनलैंड पब्लिक स्कूल सेवंथ डे एडवेंटिस्ट इंग्लिश स्कूल सरला बिरला पब्लिक स्कूल सेंट फ्रांसिस स्कूल, बहेया सेवन स्टार्स एकेडमी नोट: अन्य स्कूलों ने भी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से सत्र 2026-27 में 10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है। अनुपस्थित रहने वाले स्कूलों को नोटिस जारी करने व उनका फिजिकल वेरिफिकेशन कराने का निर्देश भी दिया गया है। आरटीई सीटों पर लॉटरी जल्द शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन के लिए जल्द ऑनलाइन लॉटरी कराने की बात कही गई। बैठक में उपायुक्त ने सेंसस 2027 के अंतर्गत पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना (Self-Enumeration) करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। इसके लिए बच्चों को भी जानकारी दें, ताकि वे अपने माता-पिता को डिजिटल माध्यम से स्व-गणना करने को कहें।



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