भद्राचलम के पुराने बाजार इलाके में खड़ा गोपालकृष्ण थिएटर आज बीते दौर की एक खामोश कहानी बन चुका है. कभी यह थिएटर शहर की शान, युवाओं की पहली पसंद और परिवारों के मनोरंजन का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था. यहां नई फिल्म लगते ही टिकट खिड़की पर लंबी कतारें लगती थीं और ‘हाउसफुल’ के बोर्ड आम बात थे. एनटी रामा राव, चिरंजीवी और अक्किनेनी नागेश्वर राव जैसे दिग्गज कलाकारों की फिल्मों पर दर्शकों की सीटियां और तालियां पूरे हॉल को गूंजा देती थीं. लेकिन वक्त बदला, मनोरंजन के तरीके बदले और मल्टीप्लेक्स व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दौर ने सिंगल स्क्रीन थिएटरों की चमक धीरे-धीरे छीन ली. कभी सपनों से जगमगाने वाला गोपालकृष्ण थिएटर अब वीरान खंडहर में तब्दील हो चुका है. टूटी छतें, धूल से ढकी कुर्सियां और फटी हुई स्क्रीन इसकी बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों ने लोगों की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं. यह थिएटर अब सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि उस दौर की आखिरी निशानी बन गया है जब सिनेमा सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं का सबसे बड़ा उत्सव हुआ करता था.
