नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में विजय थलापति की पार्टी टीवीके विधायक आर श्रीनिवासा सेठुपति के मामले में सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी की जोरदार दलीलों ने न सिर्फ मद्रास हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगवाई, बल्कि तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके सरकार के लिए भी बड़ा झटका साबित हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दखल दिया था. नतीजा यह हुआ कि थलापति विजय की पार्टी टीवीके के विधायक सेठुपति फिलहाल फिर से विधानसभा में जाने और वोट करने के हकदार हो गए.
मामला तिरुपत्तूर विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहां टीवीके के उम्मीदवार आर श्रीनिवासा सेठुपति बेहद कांटे की टक्कर में डीएमके के उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पन को सिर्फ 1 वोट से हराकर विजयी हुए थे. डीएमके ने आरोप लगाया कि एक पोस्टल बैलट गलत तरीके से दूसरे क्षेत्र में गिना गया और अगर वह सही जगह गिना जाता तो नतीजा टाई होता और फिर कानून के मुताबिक टॉस होना चाहिए था. इसी आधार पर डीएमके उम्मीदवार ने मद्रास हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जिस पर हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए सेठुपति को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने से रोक दिया था.
सिंघवी ने क्या दलीलें दी…
यही आदेश थलापति विजय की पार्टी टीवीके और विधायक सेठुपति सीधे सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंचे. यहां सेठुपति की तरफ से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने जोरदार दलील रखी. सिंघवी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 329(b) साफ कहता है कि चुनाव से जुड़े विवादों में हाई कोर्ट रिट अधिकारिता (Article 226) के तहत दखल नहीं दे सकता. ऐसे सभी मुद्दे सिर्फ Representation of the People Act (RPA) के तहत चुनाव याचिका के माध्यम से ही उठाए जा सकते हैं.
सिंघवी ने तर्क दिया कि DMK उम्मीदवार ने जो रास्ता चुना है, वह कानून के खिलाफ है क्योंकि…
1. चुनाव प्रक्रिया और नतीजों से जुड़ी गड़बड़ियों पर रिट नहीं, केवल चुनाव याचिका ही संभव है.
2. सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले पहले ही कह चुके हैं कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद और नतीजा आने तक अदालतें रिट के जरिए दखल नहीं दे सकतीं.
3. वोटों की गलत गिनती या अस्वीकार किए जाने जैसे मामले RPA की धारा 100(1)(d)(iii) के तहत आते हैं और इन्हें भी केवल चुनाव याचिका में ही चुनौती दी जा सकती है.
सिंघवी ने यह भी कहा कि मद्रास हाई कोर्ट ने पोस्टल बैलट के कथित अस्वीकार को कानून के दायरे से बाहर मानकर गंभीर गलती की है. उन्होंने कोर्ट का ध्यान इस बात पर दिलाया कि:
– अगर कोई शिकायत सीधे सेक्शन 100(1) में फिट न भी हो, तो भी वह 100(1)(d)(iv) के तहत आ सकती है, जिसमें संविधान, RPA या चुनाव नियमों के अनुपालन न होने के मामले शामिल हैं.
– सिर्फ 1 वोट का अंतर कोई ऐसी असाधारण परिस्थिति नहीं है, जो हाई कोर्ट को रिट अधिकारिता के इस्तेमाल की अनुमति दे दे, क्योंकि सेक्शन 100 खुद ऐसे मामलों को कवर करता है जहां गलत गिनती चुनाव परिणाम को प्रभावित करती है.
सिंघवी ने हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर भी सवाल उठाया जिसमें सेठुपति को विधायक के रूप में काम करने यानी विधानसभा में बैठने और वोट करने से रोक दिया गया था. उन्होंने कहा कि इस तरह का आदेश भी सिर्फ चुनाव याचिका के दायरे में ही दिया जा सकता है न कि रिट के तहत.
याचिका में यह भी कहा गया कि:
– यह पूरा मामला तथ्यात्मक विवादों से जुड़ा है, जबकि चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में DMK के आरोपों को नकार दिया है.
– ऐसे मामलों में सबूत, गवाह और ट्रायल की जरूरत होती है, जो केवल चुनाव याचिका में संभव है, न कि रिट याचिका में.
– रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी आवेदन चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले ही निपटा दिए थे और नतीजा घोषित होने के बाद उसका अधिकार क्षेत्र खत्म हो गया था.
– हाई कोर्ट ने यह कहकर कि फ्लोर टेस्ट में सेठुपति की भागीदारी से सत्ता संतुलन प्रभावित होगा, एक तरह से राजनीतिक आधार पर दखल दिया, जबकि चुनाव विवादों में यह कारक नहीं हो सकता.
दूसरी ओर डीएमके उम्मीदवार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि:
– पोस्टल बैलट की गड़बड़ी से चुनाव नतीजा प्रभावित हुआ है.
– अगर वह एक वोट सही क्षेत्र में गिना जाता, तो दोनों उम्मीदवारों के वोट बराबर होते.
– ऐसी स्थिति में कानून के मुताबिक टॉस होना चाहिए था और TVK उम्मीदवार की यह जीत वैध नहीं मानी जा सकती.
रोहतगी ने TVK विधायक की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया.
बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ टिप्पणी की कि मद्रास हाई कोर्ट ने DMK उम्मीदवार की याचिका को अपनी रिट अधिकारिता के तहत सुनकर गलती की है. जस्टिस संदीप मेहता ने दो टूक कहा, ‘यह गलत है’ कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को केवल चुनाव याचिका के जरिए ही उठाया जा सकता है, न कि Article 226 के तहत रिट में.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि:
– मद्रास हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश का प्रभाव फिलहाल पूरी तरह स्थगित रहेगा.
– हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही भी अभी के लिए रोक दी जाती है.
– DMK उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पन को 2 हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा.
– TVK के सेठुपति को भी 2 हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है.