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देवघर के किसान अंबिका प्रसाद कुशवाहा ने आधुनिक खेती से अपनी किस्मत बदल दी है. 6 एकड़ में मिश्रित खेती कर उन्होंने आलीशान घर बनाया और बच्चों को बेहतर शिक्षा दी. खेती की नई तकनीक सीखने वह इजरायल तक जा चुके हैं. उनकी सफलता साबित करती है कि समझदारी से खेती करना किसी बड़े बिजनेस से कम नहीं है.
देवघर: आज के समय में गांवों के कई युवा खेती छोड़ शहरों की तरफ भाग रहे हैं. वजह साफ है, लोगों के मन में वर्षों से यह धारणा बैठ चुकी है कि खेती में मेहनत तो बहुत है लेकिन कमाई नहीं. लोग मानते हैं कि खेती सिर्फ पेट पालने का जरिया है, इससे ना बड़ा घर बन सकता है, ना बच्चों को अच्छी पढ़ाई मिल सकती है और ना ही इंसान अपनी अलग पहचान बना सकता है.लेकिन देवघर जिले के रोहिणी स्थित गोपीडीह गांव के किसान अंबिका प्रसाद कुशवाहा ने अपनी मेहनत, समझदारी और नई सोच से इस सोच को पूरी तरह बदल कर रख दिया है. आज गांव में उनकी पहचान किसी बड़े बिजनेसमैन से कम नहीं है. लोग दूर-दूर से उनके खेत देखने आते हैं और उनकी सफलता की कहानी सुनकर हैरान रह जाते हैं.
6 एकड़ में विभिन्न फसलों की खेती
करीब 6 एकड़ जमीन में अंबिका प्रसाद मिश्रित खेती करते हैं. उनके खेतों में मूंग, धनिया, गन्ना, भिंडी, कद्दू, कोहरा, निम्बू,समेत कई तरह की सब्जियां और फसलें लहलहाती रहती हैं. खेत का हर हिस्सा कमाई का जरिया बना हुआ है. एक फसल तैयार होती है तो दूसरी खेत में बढ़ रही होती है. यही वजह है कि उनके घर में सालभर पैसे की आवक बनी रहती है. अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि पहले लोग सिर्फ एक फसल की खेती करते थे, जिससे मौसम खराब होने या बाजार में दाम गिरने पर भारी नुकसान उठाना पड़ता था. लेकिन उन्होंने खेती को पुराने तरीके से नहीं बल्कि बिजनेस की तरह करना शुरू किया.उन्होंने समझ लिया कि अगर अलग-अलग फसलों की खेती की जाए तो नुकसान का खतरा कम होगा और हर मौसम में आमदनी होती रहेगी. आज उनकी यही सोच उन्हें इलाके का सफल किसान बना चुकी है.
खेती के बदौलत गांव में बनाया शानदार मकान
किसान अंबिका कुशवाहा के घर में खेती की बदौलत इतनी समृद्धि है कि बाजार से उन्हें सिर्फ नमक खरीदना पड़ता है. बाकी जरूरत की लगभग हर चीज उनके खेतों और पशुपालन से ही पूरी हो जाती है. घर में अनाज, दाल, सब्जियां, दूध और कई दूसरी चीजें खुद की मेहनत से तैयार होती हैं. खेती से हुई कमाई से उन्होंने गांव में शानदार और आलीशान घर बनाया, जिसे देखने लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई और खेती के साथ-साथ खुद का बिजनेस भी शुरू किया.गांव में आज उनका नाम सम्मान और सफलता की पहचान बन चुका है.
खेती की ट्रैनिग के लिए जा चुके हैं इजरायल
खेती ने अंबिका प्रसाद को सिर्फ पैसा ही नहीं दिया, बल्कि देश-दुनिया देखने का मौका भी दिया. वह बताते हैं कि खेती से मिली कमाई के दम पर वह देश के सभी ज्योतिर्लिंगों का दर्शन कर चुके हैं. बाबा बैद्यनाथ धाम से शुरू हुआ उनका सफर देशभर के बड़े धार्मिक स्थलों तक पहुंचा. इसके अलावा आधुनिक खेती की तकनीक सीखने के लिए वह इजरायल तक जा चुके हैं. वहां उन्होंने ड्रिप इरिगेशन, कम पानी में ज्यादा उत्पादन और आधुनिक खेती के कई तरीके सीखे. आज उन्हीं तकनीकों का इस्तेमाल कर वह कम लागत में ज्यादा उत्पादन ले रहे हैं और दूसरे किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं.
खेती से बदल सकती है किस्मत
अंबिका प्रसाद कहते हैं कि खेती में सिर्फ मेहनत नहीं, समझदारी भी जरूरी है. अगर किसान नई तकनीक, सही योजना और बाजार की मांग के अनुसार खेती करें तो खेती किसी नौकरी से कम नहीं है. उनकी कहानी उन लोगों के लिए जवाब है जो खेती को मजबूरी समझते हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि खेत सिर्फ अनाज नहीं उगाता, बल्कि मेहनत और सही सोच हो तो यही खेत इंसान की किस्मत भी बदल सकता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.