कंप्यूटर से डिलीटेड डेटा ही खोलेंगे राज, इसलिए एफएसएल जांच की रिपोर्ट जरूरी सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले ट्रेजरी घोटाले की जांच पर सिस्टम की सुस्ती का ग्रहण लग गया है। इस मामले की परतें खोलने के लिए गठित सीआईडी की एसआईटी की जांच की रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई है। इस फर्जीवाड़े के वैज्ञानिक सबूत उगलवाने की मुहिम 20 दिनों से सरकारी लैब की फाइलों में अटकी हुई है। एसआईटी ने बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में दर्ज तीन बड़े वित्तीय घोटालों को टेकओवर करते हुए नए सिरे से केस दर्ज किया था। शुरुआती कार्रवाई में एसआईटी ने बोकारो व हजारीबाग के एसपी ऑफिस में दबिश दी थी। वहां से उन कंप्यूटरों के हार्ड डिस्क को जब्त किया था, जिनका इस्तेमाल पुलिसकर्मियों व स्टाफ के वेतन निकासी के बिल बनाने के लिए किया जाता था। एसआईटी ने 25 अप्रैल को इन हार्ड डिस्क को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा था। मगर अब तक डेटा एनालिसिस रिपोर्ट नहीं आई है। बोकारो एसपी दफ्तर से गिरफ्तार ये 4 मोहरे… कौशल कुमार पांडेय: इस पूरे नेक्सस का मुख्य आरोपी, जिसने सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर फर्जीवाड़े का ताना-बाना बुना। सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह: गृह रक्षा वाहिनी (होमगार्ड) का जवान, जो बोकारो एसपी कार्यालय में लंबे समय से जमे रहकर इस खेल में शामिल था। काजल मंडल: लेखा शाखा में ही तैनात सिपाही, इस हेरफेर में सक्रिय रूप से शामिल था। अशोक कुमार भंडारी: एएसआई, जो लेखा शाखा के हर फर्जीवाड़े से वाकिफ था। एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट इस पूरे केस की रीढ़ की हड्डी है। चूंकि आरोपियों ने बड़ी चालाकी से कंप्यूटर से सभी फर्जी बिलों के निशान मिटा दिए हैं, इसलिए अब सारा दारोमदार फॉरेंसिक जांच पर टिका है। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स इन जब्त हार्ड डिस्क से डिलीट किए जा चुके डेटा को रिकवर करेंगे। डेटा रिकवर होने के बाद ही एसआईटी को यह पक्का सबूत मिल सकेगा कि दोनों जिलों के एसपी कार्यालय में बैठकर आरोपियों ने वास्तव में किन-किन फर्जी लोगों के नाम पर सैलरी बिल जेनरेट किए थे और उनके एवज में कुल कितनी अवैध सरकारी राशि की निकासी कर सरकार को चूना लगाया गया।
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