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हजारीबाग में 59 स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों का वेतन रोका, शोकॉज...




झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की मैट्रिक परीक्षा में 95 प्रतिशत से कम रिजल्ट देने वाले हजारीबाग जिले के 59 हाई स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है। इनसे एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने बताया कि इस बार रिजल्ट में हजारीबाग 14वें स्थान पर रहा। जबकि पिछले साल यह सातवें स्थान पर था। जिन स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, उनमें पीएमश्री केबी हाई स्कूल, हिंदू प्लस टू स्कूल, केएन प्लस टू स्कूल इचाक, राम नारायण प्लस टू स्कूल पदमा और पीएमश्री स्कूल देवकुली, सलगावां, पबरा, सरौनी व ढौठवा आदि शामिल हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी पर्याप्त है। इस बार गणित, अंग्रेजी और विज्ञान में बड़ी संख्या में बच्चे फेल हो गए हैं, जिसके कारण इन स्कूलों का रिजल्ट गिरा है। मैट्रिक-इंटर के रिजल्ट की आज समीक्षा करेंगे शिक्षा सचिव
रांची | स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह सोमवार को मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट की समीक्षा करेंगे। सचिव ने बताया कि कुछ जिलों के डीसी और डीईओ ने अपने स्तर पर प्राचार्यों को शोकॉज किया है। विभागीय स्तर पर सोमवार को यह निर्णय लिया जाएगा कि किन-किन बिंदुओं पर प्राचार्यों को शोकॉज किया जाए। सभी जिलों के खराब रिजल्ट वाले हाई स्कूलों के प्राचार्यों और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वेतन भी रोका जा सकता है। बैठक में कई शिक्षा अधिकारी मौजूद रहेंगे। सभी स्कूलों में पर्याप्त व विषयवार शिक्षक :डीईओ
डीईओ प्रवीण रंजन ने कहा है कि लगभग सभी स्कूलों में पर्याप्त और विषयवार शिक्षक हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनमें एक विषय के दो-दो शिक्षक हैं। इसके बाद भी रिजल्ट संतोषजनक न होने के लिए शिक्षक जिम्मेदार है। जिनके जवाब में सही व​जह मिलेगी, उन पर विचार होगा। हिंदू प्लस टू स्कूल हजारीबाग शिक्षकों ने बताया कि आठवीं पास करने के बाद नौवीं में बच्चों का हाई स्कूल में एडमिशन होता है। इनरोलमेंट बढ़ाने के लिए कम अंक वाले विद्याथियों का भी एडमिशन ले लिया जाता है। वे एक पैराग्राफ भी ढंग से नहीं लिख पाते हैं। नौवीं कक्षा में विद्यार्थियों का सेंटअप टेस्ट भी बंद कर दिया गया है। वे सीधे मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होते हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को साल भर गैर शैक्षणिक कार्यों जैसे चुनाव, ट्रेनिंग, सावित्री बाई फुले योजना, बैंक खाता खोलने और आय प्रमाण पत्र भरने जैसे काम में लगा दिया जाता है। सभी उन्हें जनगणना में ​लगाया गया है। इस कारण शिक्षक बच्चों पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते। यह भी रिजल्ट खराब होने का बड़ा कारण है। झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव रविंद्र कुमार चौधरी ने स्कूलों में ​सेंटअप टेस्ट शुरू करने और शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग रखने की मांग की है।



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