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पलामू में एल नीनो का खतरा! मौसम विभाग के अलर्ट पर कृषि विभाग ने शुरू की तैयारी

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इस बार मौसम में एल नीनो के प्रभाव को देखते हुए कम वर्षा होने की संभावना जताई जा रही है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद कृषि विभाग भी पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. किसानों को संभावित सूखे और कम बारिश की स्थिति से बचाने के लिए खरीफ कमर्शियल सह सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है.

पलामू: इस बार मौसम में एल नीनो के प्रभाव को देखते हुए कम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद कृषि विभाग भी पूरी तरह सतर्क हो गया है. किसानों को संभावित सूखा और कम वर्षा की स्थिति से बचाने के लिए खरीफ कमर्शियल सह सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है. इस सेमिनार में किसानों को खेती की वैकल्पिक योजना यानी कंटीजेंसी प्लान की जानकारी दी जाएगी, ताकि कम बारिश में भी बेहतर उत्पादन किया जा सके. कृषि विभाग का उद्देश्य किसानों को बदलते मौसम के अनुसार वैज्ञानिक खेती के लिए तैयार करना है.

बारिश के बीच रहेगा लंबा गैप
जिला कृषि पदाधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि इस बार सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार बारिश के दौरान करीब 15 दिनों का लंबा गैप देखने को मिल सकता है. यानी बीच-बीच में लंबे समय तक बारिश नहीं होगी. पलामू जिले में इस बार औसत वर्षा भी कम रहने का अनुमान है. इसी को देखते हुए कृषि और सहकारिता विभाग पहले से तैयारी में जुट गया है. राज्य स्तर पर आयोजित कार्यशाला से मिले दिशा-निर्देशों के आधार पर जिला स्तर पर भी किसानों को जागरूक किया जा रहा है.

खेत में पानी रोकने की दी जा रही सलाह
कृषि विभाग किसानों को गहरी जुताई करने और खेतों की मेड़बंदी मजबूत करने की सलाह दे रहा है, ताकि बारिश का पानी खेतों में अधिक समय तक रोका जा सके. विभाग का कहना है कि इस बार खेत में नमी बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी. इसके अलावा किसानों को इंटर क्रॉपिंग यानी एक ही खेत में दो फसल लगाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है. उदाहरण के तौर पर अगर किसान अरहर की खेती करते हैं तो उसके साथ मूंग जैसी दूसरी फसल भी लगा सकते हैं. इससे कम बारिश की स्थिति में नुकसान कम होगा और किसानों को अतिरिक्त आय भी मिलेगी.

कम पानी वाली फसलों पर रहेगा जोर
कृषि विभाग ने किसानों को अधिक पानी वाली फसल, खासकर धान की खेती कम करने और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है. मध्यम और ऊपरी जमीन वाले क्षेत्रों में तेलहन और दलहन फसलों पर विशेष जोर दिया जाएगा. जिला स्तर पर आयोजित कार्यशालाओं में कृषि वैज्ञानिक किसानों को मौसम के अनुसार खेती की तकनीक, सही फसल चयन और जल संरक्षण के उपायों की जानकारी देंगे. विभाग का मानना है कि समय रहते तैयारी करने से किसान कम बारिश के बावजूद अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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