सूरज आसमान से आग की लपटें बरसा रहा है, पारा 45 डिग्री के पार है और देश का कोना-कोना भीषण लू की चपेट में है. एसी, कूलर और पंखों की अंतहीन मांग के बीच मंगलवार दोपहर ठीक 3 बजकर 40 मिनट पर भारतीय पावर ग्रिड पर एक ऐसा ऐतिहासिक दबाव आया, जिसने दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देशों के पसीने छुड़ा दिए. लेकिन भारतीय ग्रिड ने बिना पलक झपकाए इतिहास रच दिया. इस महा-संकट के बीच भारत ने रिकॉर्ड 260.45 गीगावाट (GW) बिजली की मांग को न सिर्फ छुआ, बल्कि उसे सफलतापूर्वक पूरा करके दिखा दिया. भारत की इस ताकत का अंदाजा आप इस आंकड़े से लगाइए कि जितने में हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान पूरा का पूरा रोशन हो जाता है (28.3 GW), भारत ने एक झटके में उसका पूरे 9 गुना से भी ज्यादा का लोड उठा लिया. यह सिर्फ बिजली की सप्लाई नहीं, बल्कि नए भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत है.
एक ही दिन में टूटा पिछला रिकॉर्ड
ऊर्जा मंत्रालयने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि मंगलवार दोपहर 3:40 बजे देश में कुल 260.45 गीगावाट (GW) की रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज की गई, जिसे बिना किसी रुकावट के पूरा किया गया. यह आंकड़ा सोमवार को दर्ज की गई 257.37 गीगावाट की मांग से भी कहीं अधिक है. दिल्ली में भी इस सीजन की सबसे अधिक बिजली मांग दोपहर 3:30 बजे 7,776 मेगावाट (MW) दर्ज की गई.
पड़ोसी देशों के मुकाबले 5 गुना मजबूत है भारत
भारत के पावर ग्रिड की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह हमारे सभी दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों की कुल मिलाकर होने वाली बिजली मांग से भी पांच गुना से अधिक है. यदि हम पाकिस्तान (28.3 GW), बांग्लादेश (16.5 GW), श्रीलंका (3 GW), नेपाल (2.2 GW), भूटान (1.2 GW), और अफगानिस्तान (0.8 GW) की अधिकतम बिजली मांग को जोड़ दें, तो यह लगभग 52 गीगावाट बैठती है. भारत अकेले 260.45 गीगावाट की मांग को संभाल रहा है, जो दिखाता है कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कितना विशाल और मजबूत हो चुका है.
कैसे मुमकिन हुई निर्बाध बिजली सप्लाई?
इस अभूतपूर्व मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने एडवांस रिसोर्स प्लानिंग (Resource Adequacy Planning) और रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन का सहारा लिया. नेशनल, रीजनल और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटरों (NLDC, RLDC, SLDC) ने बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ मिलकर काम किया. देश की बिजली सप्लाई को चालू रखने में थर्मल पावर (कोयला आधारित) ने रीढ़ की हड्डी की भूमिका निभाई, जिसका कुल हिस्सेदारी में लगभग 67% योगदान रहा. इसके साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) ने भी बड़ा सहारा दिया, जिसमें अकेले सोलर पावर ने पीक आवर्स के दौरान 21% से अधिक (56,204 MW) बिजली ग्रिड को दी. हाइड्रो, न्यूक्लियर, गैस और आधुनिक बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के मिले-जुले उपयोग ने ग्रिड को फेल होने से बचाया और देश को अंधेरे में डूबने से रोक लिया.
सवाल-जवाब
मंगलवार को भारत में कितनी पीक पावर डिमांड दर्ज की गई?
मंगलवार को दोपहर 3:40 बजे देश के इतिहास की सबसे अधिक 260.45 गीगावाट (GW) की पीक पावर डिमांड दर्ज की गई और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया.
पड़ोसी देशों के मुकाबले भारतीय पावर ग्रिड की क्षमता कितनी बड़ी है?
पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और अफगानिस्तान की कुल मिलाकर बिजली की मांग करीब 52 GW है. भारत का पावर ग्रिड अकेले इन सभी देशों की कुल मांग से 5 गुना से भी ज्यादा (260.45 GW) लोड संभाल रहा है.
इस भारी मांग को पूरा करने में किस ऊर्जा स्रोत का सबसे बड़ा योगदान रहा?
इस मांग को पूरा करने में थर्मल पावर (कोयला) सबसे बड़ा जरिया रहा, जिसने कुल बिजली उत्पादन में करीब 67% का योगदान दिया. इसके अलावा सोलर पावर ने 21% से अधिक का योगदान दिया.