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RBI New Rule : रिजर्व बैंक ने कर्ज वसूली के लिए नए प्रस्ताव पेश किए हैं, जिन्हें 1 अक्टूबर, 2026 से लागू किया जा सकता है. आरबीआई ने कहा है कि अगर किसी ग्राहक ने फाइनेंस कराकर मोबाइल या लैपटॉप खरीदा है और 90 दिन से ज्यादा का डिफॉल्ट किया है तो बैंक उसकी सर्विस बंद कर सकते हैं.
आरबीआई ने बैंकों को लोन डिफॉल्टर्स के मोबाइल बंद करने की अनुमति का प्रस्ताव दिया है.
नई दिल्ली. टेलीग्राम रेगुलेटर ट्राई के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि भारत अब दुनिया के सबसे बडे़ मोबाइल फोन बाजार में से एक बन चुका है, जहां 1.16 अरब मोबाइल कनेक्शन हैं. देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक उपभोक्ताओं में से एक तिहाई यानी करीब 40 करोड़ ने छोटे लोन लेकर अपने गैजेट्स खरीदे हैं. इसका मतलब है कि अगर 3 में से करीब 1 आदमी अपना लैपटॉप और मोबाइल फाइनेंस कराकर खरीदता है. रिजर्व बैंक ने ऐसे उपभोक्ताओं के लिए अब नियमों को कड़ा करने का मन बना लिया है. आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि अगर फाइनेंस पर खरीदे मोबाइल या लैपटॉप की ईएमआई नहीं चुकाई गई तो बैंक इन गैजेट्स के फंक्शंस को बंद कर सकते हैं.
रिजर्व बैंक के हालिया प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की ईएमआई 90 दिन से ज्यादा समय से बकाया रही तो बैंकों को पहले नोटिस देना होगा और फिर इन गैजेट्स को बंद करा सकते हैं. आरबीआई ने कहा है कि लोन लेने वालों को पहले 60 दिन का ओवरड्यू होने पर नोटिस देना होगा और पुनर्भुगतान के लिए 21 दिन का समय देना होगा. इसके बावजूद अगर पैसे नहीं चुकाए जाते तो बैंक दूसरी नोटिस देकर एक सप्ताह का समय और देंगे फिर उसके बाद गैजेट्स को बंद कराया जा सकता है.
ग्राहक से पहले ही लेनी होगी अनुमति
आरबीआई ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि कर्ज देने वाले बैंकों को लोन देते समय ही ग्राहक के साथ इस तरह का कॉन्ट्रैक्ट बनवाना होगा और उसकी अनुमति भी लेनी होगी. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले साल ही बताया था कि आरबीआई ऐसे कानून पर विचार कर रहा है जो बैंकों को अपने कर्ज वसूलने के लिए स्मार्टफोन या लैपटॉप को लॉक करने की अनुमति देगा, ताकि ग्राहकों पर बैंकों के पैसे लौटाने का दबाव डाला जा सके.
जरूरी सेवाएं बंद नहीं कर सकेंगे बैंक
आरबीआई ने अपने प्रस्ताव में यह भी कहा है कि बकाया कर्ज की वसूली के दौरान सख्त और अनुचित तरीकों पर रोक जारी रहेगी. बैंक डिफॉल्ट करने वाले उधारकर्ताओं के मोबाइल फोन की सेवाओं को बंद या सीमित नहीं कर सकेंगे. बैंक किसी तकनीक की मदद से इंटरनेट, इनकमिंग कॉल, आपातकालीन एसओएस और सरकारी सुरक्षा संदेश जैसी जरूरी सेवाओं को बाधित नहीं कर सकेंगे. यदि उधारकर्ता बकाया चुका देता है, तो एक घंटे के भीतर सभी सेवाएं बहाल करनी होंगी. ऐसा न करने पर बैंक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा.
बैंक रखेंगे हर कॉल का रिकॉर्ड
रिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज वसूली के लिए नियुक्त एजेंटों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर उधारकर्ता की जानकारी साझा करना या बार-बार कॉल करना और संदेश भेजना कठोर वसूली तरीकों में शामिल होगा. इन सभी तरीकों पर रोक रहेगी. बैंकों को वसूली कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें कॉल की संख्या, समय और बातचीत का विवरण शामिल होगा. इन प्रस्तावित नियमों को एक अक्टूबर, 2026 से लागू करने की योजना है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें