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CM Vijay Cabinet Expansion News: CM विजय की कैबिनेट में बड़ा ड्रामा!...


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विजय की कैबिनेट में बड़ा ड्रामा! दो सगे दोस्तों ने ऐन वक्त पर क्यों बदला पाला?

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CM Vijay Cabinet Expansion News: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की कैबिनेट विस्तार के बाद नई सियासी हलचल शुरू हो गई है. सरकार को समर्थन देने वाले VCK और IUML ने मंत्री पद से दूरी बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. दोनों दलों ने अब तक अपने मंत्री पद के नाम तय नहीं किए हैं. राजनीतिक जानकार इसे DMK कनेक्शन, बड़े मंत्रालय की मांग और विजय सरकार की स्थिरता से जोड़कर देख रहे हैं. AIADMK में बगावत के बाद तमिलनाडु की राजनीति और जटिल हो गई है. अब सवाल यह है कि क्या विजय अपने सहयोगियों को पूरी तरह साथ रख पाएंगे या आगे और बड़ा सियासी ड्रामा देखने को मिलेगा.

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विजय की कैबिनेट में बड़ा ड्रामा! दो सगे दोस्तों ने ऐन वक्त पर क्यों बदला पाला?Zoom

तमिलनाडु में CM विजय की कैबिनेट विस्तार के बाद बड़ा सियासी ड्रामा. (फोटो- पीटीआई)

CM Vijay News: तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं दिख रही. सुपरस्टार से मुख्यमंत्री बने जोसेफ विजय ने जैसे ही अपनी कैबिनेट का विस्तार किया वैसे ही सियासी गलियारों में नई हलचल शुरू हो गई. जिन सहयोगियों ने सरकार बनाने के वक्त विजय का साथ देकर सत्ता तक पहुंचाया, वही अब मंत्री पद से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं. VCK और IUML जैसे सहयोगी दलों का कैबिनेट विस्तार से बाहर रहना सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सत्ता के भीतर चल रही बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद जिस तरह नंबर गेम चला, उसने पहले ही तमिलनाडु की राजनीति को अस्थिर बना दिया था. अब कैबिनेट में शामिल न होने का फैसला इस बात का संकेत दे रहा है कि विजय सरकार को समर्थन देने वाले दल अभी पूरी तरह भरोसे में नहीं आए हैं. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या ये दोनों दल भविष्य की राजनीति देखकर अपने पत्ते संभालकर चल रहे हैं या फिर मंत्री पद के लिए बड़ा सौदा चाहते हैं.

दरअसल, विजय सरकार बहुमत के बेहद करीब पहुंचकर बनी थी. TVK सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन जादुई आंकड़े से पीछे रह गई. ऐसे में कांग्रेस, वाम दलों, VCK और IUML ने समर्थन देकर सरकार बचाई. अब जब कैबिनेट विस्तार हुआ तो कांग्रेस को जगह मिली, लेकिन VCK और IUML के नेता शपथ समारोह से गायब रहे. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों का दावा है कि दोनों दलों को एक-एक मंत्री पद का आश्वासन दिया गया है, लेकिन उन्होंने अभी तक अपने नाम तय नहीं किए हैं. राजनीतिक जानकार इसे साधारण देरी नहीं मान रहे. उनका कहना है कि दोनों दल पहले विजय सरकार की स्थिरता और भविष्य देखना चाहते हैं. खास बात यह भी है कि इन दोनों दलों के DMK से पुराने संबंध रहे हैं. ऐसे में सीधे TVK सरकार में शामिल होना उनके लिए आसान फैसला नहीं है. यही वजह है कि तमिलनाडु की राजनीति में “दोस्ती और दूरी” का यह खेल चर्चा का विषय बन गया है.

कैबिनेट विस्तार के बाद साफ हो गया है कि विजय के लिए सरकार बनाना जितना मुश्किल था उसे संभालना उससे भी ज्यादा कठिन होने वाला है.

विजय सरकार पर बढ़ता दबाव

  • विजय ने अपनी कैबिनेट में TVK के 21 विधायकों और कांग्रेस के दो नेताओं को शामिल किया. इसके बाद कुल मंत्रियों की संख्या 32 पहुंच गई है. तमिलनाडु विधानसभा में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं. यानी विजय ने जानबूझकर तीन पद खाली छोड़े हैं. इसे VCK और IUML के लिए राजनीतिक संदेश माना जा रहा है. लेकिन दोनों दलों ने अब तक अपने मंत्री पद के उम्मीदवारों का नाम नहीं भेजा.
  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि VCK और IUML फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर चल रहे हैं. वे देखना चाहते हैं कि विजय सरकार प्रशासन में कितना सफल रहती है. साथ ही यह भी कि क्या TVK भविष्य में भरोसेमंद सहयोगी साबित होगी. अगर सरकार अस्थिर हुई तो इन दलों को राजनीतिक नुकसान हो सकता है. इसलिए दोनों दल फिलहाल खुलकर सत्ता में शामिल होने से बच रहे हैं.

DMK से रिश्तों ने बढ़ाई दुविधा

VCK और IUML लंबे समय तक MK स्टालिन की DMK के करीबी सहयोगी रहे हैं. चुनाव के बाद भी इन दलों ने साफ कहा था कि उन्होंने विजय सरकार को समर्थन ‘राज्य में राष्ट्रपति शासन रोकने’ के लिए दिया. यानी उनका समर्थन पूरी तरह वैचारिक नहीं बल्कि परिस्थितिजन्य था. ऐसे में अगर वे सीधे विजय सरकार में शामिल होते हैं तो DMK से दूरी बढ़ सकती है. यही वजह है कि दोनों दल अब हर कदम बेहद सावधानी से रख रहे हैं.

क्या बड़े मंत्रालय की चल रही है डील?

तमिलनाडु की राजनीति में यह चर्चा भी तेज है कि VCK और IUML बेहतर मंत्रालयों के लिए दबाव बना रहे हैं. खबरें हैं कि VCK प्रमुख थोल तिरुमावलवन डिप्टी सीएम जैसे बड़े पद की उम्मीद लगाए बैठे थे. हालांकि पार्टी ने इन दावों को खारिज किया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि कैबिनेट में शामिल होने में देरी करके दोनों दल अपने लिए ज्यादा ताकतवर मंत्रालय चाहते हैं.

AIADMK के बागियों ने बदल दिया पूरा खेल

विजय सरकार के लिए सबसे बड़ी राहत AIADMK में हुई बगावत बनी. 25 विधायकों ने EPS नेतृत्व के खिलाफ जाकर फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार का समर्थन किया. इससे सरकार को स्थिरता मिली. लेकिन इसी ने VCK और IUML की चिंता भी बढ़ा दी. अगर AIADMK का बागी गुट सरकार में शामिल हो गया तो इन दोनों दलों की राजनीतिक अहमियत कम हो सकती है. इसलिए वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहते.

विजय सरकार के सामने अब असली चुनौती

कैबिनेट विस्तार के बाद साफ हो गया है कि विजय के लिए सरकार बनाना जितना मुश्किल था उसे संभालना उससे भी ज्यादा कठिन होने वाला है. सहयोगियों की नाराजगी, AIADMK का संकट और DMK का दबाव आने वाले महीनों में तमिलनाडु की राजनीति को और गर्म कर सकता है. फिलहाल VCK और IUML दोनों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. लेकिन इतना तय है कि विजय सरकार की स्थिरता अब सिर्फ नंबर गेम नहीं, बल्कि राजनीतिक भरोसे की परीक्षा बन चुकी है.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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