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पहले सब्जियों की खेती के लिए बांस खरीदना पड़ता था, जिससे किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता था. लेकिन देवघर के किसान अंबिका जी ने एक अलग पहल करते हुए बांस की ही खेती शुरू कर दी, जो अब उनकी आमदनी का बड़ा जरिया बन गई है. उन्होंने करीब एक एकड़ जमीन में बांस का पौधारोपण किया है. इससे न सिर्फ उनकी खेती की जरूरतें पूरी हो रही हैं, बल्कि हर महीने उन्हें हजारों रुपये की अतिरिक्त कमाई भी हो रही है.
देवघर: कई बार खेती में सफलता किसी बड़ी तकनीक से नहीं, बल्कि एक छोटे से विचार से मिलती है. देवघर प्रखंड के किसान अंबिका जी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. एक समय था जब उन्हें अपनी सब्जियों की खेती के लिए हर साल बांस खरीदना पड़ता था. खेत में मचान बनाने, फसलों को सहारा देने और घेराबंदी करने के लिए बड़ी मात्रा में बांस की जरूरत होती थी, जिससे अच्छा-खासा खर्च हो जाता था. लेकिन समय के साथ उन्होंने सोचा कि जब हर साल बांस की जरूरत पड़ती ही है, तो क्यों न इसकी खेती खुद की जाए. इसी सोच ने उनकी खेती की दिशा बदल दी और आज वही बांस उनके लिए अतिरिक्त आय का मजबूत साधन बन गया है.
क्या कहते हैं किसान
अंबिका जी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने करीब एक एकड़ जमीन में बांस का पौधारोपण किया था. शुरुआत में उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि भविष्य में इससे इतनी अच्छी आमदनी होने लगेगी. धीरे-धीरे पौधे बड़े हुए और बांस तैयार होने लगा. अब स्थिति यह है कि उनके खेत में तैयार होने वाले बांस की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है. गांव और आसपास के क्षेत्रों के किसान खेती के विभिन्न कार्यों के लिए उनसे बांस खरीदने आते हैं. वर्तमान समय में एक बांस करीब 200 रुपये तक बिक जाता है. इससे उन्हें हर महीने अच्छी अतिरिक्त आय हो जाती है. खेती के साथ-साथ बांस की बिक्री से होने वाली कमाई उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बना रही है.
बेचने के साथ-साथ खेती में भी होता है उपयोग
बांस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका उपयोग खेती के कई महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है. सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को मचान बनाने के लिए बड़ी संख्या में बांस की आवश्यकता होती है. लौकी, करेला, नेनुआ, खीरा और अन्य बेल वाली फसलों के लिए मजबूत मचान तैयार करने में बांस सबसे उपयोगी सामग्री मानी जाती है. इसके अलावा खेतों की घेराबंदी करने, पौधों को सहारा देने और कई अन्य कृषि कार्यों में भी बांस का व्यापक उपयोग होता है. यही कारण है कि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है और किसानों को इसे बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती.
अब नहीं पड़ती बांस खरीदने की जरूरत
अंबिका जी का कहना है कि बांस की खेती ने उनकी कई समस्याओं का समाधान कर दिया है. अब उन्हें अपनी खेती के लिए अलग से बांस खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. जब भी आवश्यकता होती है, वे अपने खेत से ही बांस निकालकर उसका उपयोग कर लेते हैं. इससे खेती की लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है. उन्होंने बताया कि बांस केवल खेती के काम ही नहीं आता, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग जलावन के रूप में भी किया जाता है. जब रसोई गैस की कीमतें बढ़ जाती हैं या किसी कारण से ईंधन की जरूरत होती है, तब बांस काफी उपयोगी साबित होता है. यानी एक ही फसल से उन्हें कई तरह के फायदे मिल रहे हैं.
जरूरत को समझकर खेती करने से बढ़ता है मुनाफा
अंबिका जी का मानना है कि किसान यदि अपनी जरूरतों को समझकर खेती करें, तो कम लागत में भी बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. उनके अनुसार कई बार जरूरत ही सबसे अच्छा विचार देती है. जिस बांस को वह पहले बाजार से खरीदकर लाते थे, आज वही बांस उनकी आय का एक बड़ा स्रोत बन गया है. उनकी यह पहल आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. खेती में थोड़ी दूरदर्शिता, सही योजना और जरूरत के अनुसार फसल चयन करके किसान अपनी आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी कर सकते हैं. देवघर के किसान अंबिका जी की बांस की खेती इसका एक बेहतरीन उदाहरण है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें