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Darulshifa Hyderabad Controversy: क्या मिट जाएगी 16वीं सदी की वो इमारत जिसने...


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Darulshifa Hyderabad Controversy: हैदराबाद में 1595 में निर्मित ऐतिहासिक दारुश्शिफा परिसर को ढहाने के प्रस्ताव पर विवाद गहरा गया है. कुतुब शाही दौर का यह ढांचा भारत का पहला मुफ्त आवासीय यूनानी अस्पताल और कॉलेज था. वर्तमान में जर्जर हो चुकी इस इमारत को हटाकर प्रशासन नया बहुमंजिला अस्पताल बनाना चाहता है, जबकि इतिहासकार और हेरिटेज एक्टिविस्ट्स इसे ढहाने के बजाय रेस्टोरेशन के जरिए संरक्षित करने की मांग कर रहे हैं.

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Hyderabad: हैदराबाद की ऐतिहासिक पहचान और कुतुब शाही दौर की बेजोड़ वास्तुकला के प्रतीक दारुश्शिफा परिसर को लेकर इन दिनों एक नया विवाद खड़ा हो गया है. सन् 1595 में सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा बनवाई गई यह दोमंजिला ऐतिहासिक इमारत आज संरक्षणवादियों और प्रशासनिक योजनाओं के बीच खींचतान का मुख्य केंद्र बन चुकी है. चारमीनार के समकालीन माने जाने वाले इस भव्य ढांचे का एक गौरवशाली अतीत रहा है. यह कभी न केवल भारतीय उपमहाद्वीप बल्कि पूरे क्षेत्र का पहला मुफ्त आवासीय यूनानी अस्पताल और चिकित्सा महाविद्यालय था. यहाँ सदियों पहले देश-विदेश के विख्यात हकीमों द्वारा मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाता था और छात्रों को यूनानी चिकित्सा पद्धति की शिक्षा दी जाती थी.

वर्तमान स्थिति की बात करें तो प्रशासनिक उपेक्षा और उचित रखरखाव के अभाव में इस ऐतिहासिक धरोहर का एक बड़ा हिस्सा बेहद जर्जर हो चुका है. परिसर के भीतर वर्षों से संचालित सरकारी यूनानी अस्पताल की छतें और दीवारें गिरने के कारण, सुरक्षा के मद्देनजर अस्पताल को अस्थायी रूप से दूसरी सरकारी इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया है. इसके बाद, तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस जर्जर ढांचे को पूरी तरह ढहाने का प्रस्ताव रखा है. सरकार की योजना इस खाली जमीन पर पुरानी बस्ती के निवासियों के लिए एक आधुनिक, बहुमंजिला यूनानी अस्पताल परिसर का निर्माण करने की है.

इतिहासकारों और हेरिटेज एक्टिविस्ट्स ने खोला मोर्चा
प्रशासन के इस कदम का शहर के इतिहासकारों, हेरिटेज एक्टिविस्ट्स और जागरूक नागरिकों ने पुरजोर विरोध किया है. संरक्षणवादियों का तर्क है कि इस अमूल्य धरोहर को गिराने के बजाय कंजर्वेशन आर्किटेक्ट्स की तकनीकी मदद से पुनर्जीवित किया जाना चाहिए. उन्होंने मोअज्जम जाही मार्केट और बंसीलालपेट बावड़ी के सफल रेस्टोरेशन का उदाहरण देते हुए मांग की है कि दारुश्शिफा के मूल ढांचे को हर हाल में संरक्षित किया जाए.

आधुनिक विकास बनाम ऐतिहासिक विरासत की जंग
आंदोलनकारियों का कहना है कि नए आधुनिक अस्पताल का निर्माण परिसर के ही किसी दूसरे खुले पड़े हिस्से में किया जाना चाहिए ताकि इतिहास भी जिंदा रहे और विकास भी हो. वर्तमान में, हैदराबाद का यह ऐतिहासिक कोना आधुनिक चिकित्सा ढांचे की जरूरत और चार सदी पुरानी विरासत को बचाने की लड़ाई के बीच खड़ा है. अब देखना यह होगा कि सरकार इस विरासत को मलबे में तब्दील करती है या इसे नया जीवन देती है.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें



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