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अंतरिक्ष में भारत का नया ‘खेल’! चीन-अमेरिका की हो गई बोलती बंद,...


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अंतरिक्ष में भारत का नया ‘खेल’! चीन-US की हुई बोलती बंद, बनेंगे प्राइवेट रॉकेट

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भारत ने अंतरिक्ष सेक्टर में बड़ा दांव खेलते हुए गुजरात और तमिलनाडु में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने को मंजूरी दे दी है. इन हाईटेक क्लस्टर में अब प्राइवेट कंपनियां भी रॉकेट, सैटेलाइट और लॉन्च सिस्टम तैयार कर सकेंगी. गुजरात के खोराज में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क और तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्पेस व्हीकल्स क्लस्टर बनाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे भारत ग्लोबल स्पेस मार्केट में बड़ी ताकत बनकर उभरेगा. यह कदम स्टार्टअप्स, एमएसएमई और निजी कंपनियों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है.

अंतरिक्ष में भारत का नया 'खेल'! चीन-US की हुई बोलती बंद, बनेंगे प्राइवेट रॉकेटZoom

स्‍पेस की दुनिया में भारत ने नया कदम बढ़ाया है. यह कदम चीन और अमेरिका के लिए किसी झटके से कम नहीं है.

India Space News: भारत अब अंतरिक्ष की दुनिया में ऐसा बड़ा दांव खेलने जा रहा है, जिसने चीन और अमेरिका जैसे देशों की बोलती बंद कर दी है. केंद्र सरकार ने गुजरात और तमिलनाडु में बड़े स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने को मंजूरी दे दी है. खास बात यह है कि यहां सिर्फ सरकारी एजेंसियां ही नहीं, बल्कि प्राइवेट कंपनियां भी रॉकेट और स्पेस सिस्टम तैयार कर सकेंगी. यानी आने वाले समय में भारत में निजी कंपनियों के बनाए रॉकेट अंतरिक्ष में उड़ते नजर आ सकते हैं.

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पूरी दुनिया में स्पेस इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है. सैटेलाइट लॉन्च से लेकर स्पेस टेक्नोलॉजी तक, हर देश इस सेक्टर में अपनी ताकत बढ़ाने में जुटा है. भारत भी अब इस दौड़ में सिर्फ हिस्सा लेने नहीं, बल्कि नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है. गुजरात के खोराज में ‘स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क’ बनाया जाएगा. यहां सैटेलाइट, पेलोड सिस्टम और स्पेसक्राफ्ट से जुड़े उपकरण तैयार किए जाएंगे.

  1. ‘स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क’ में हाईटेक टेस्टिंग और डेवलपमेंट की सुविधाएं भी होंगी. इससे भारत में स्पेस टेक्नोलॉजी बनाने वाली कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा.
  2. तमिलनाडु के तूतीकोरिन में “स्पेस व्हीकल्स क्लस्टर” तैयार किया जाएगा. यह जगह छोटे रॉकेट और लॉन्च सिस्टम बनाने के लिए खास तौर पर विकसित की जा रही है.
  3. यहां रॉकेट सिस्टम की टेस्टिंग, इंटीग्रेशन और प्रोपल्शन वैलिडेशन जैसी एडवांस सुविधाएं मौजूद होंगी. यह क्लस्टर कुलसेकरपट्टनम में बनने वाले छोटे लॉन्च कॉम्प्लेक्स के पास होगा, जिससे लॉन्चिंग प्रॉसेस और आसान हो जाएगा.
  4. अब तक भारत का स्पेस सेक्टर ज्यादातर इसरो के इर्द-गिर्द ही सीमित था, लेकिन सरकार ने कुछ साल पहले इसे निजी कंपनियों के लिए खोल दिया था.
  5. इसके बाद कई भारतीय स्टार्टअप्स ने छोटे रॉकेट और सैटेलाइट बनाने शुरू किए. अब सरकार उन्हें ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर देने जा रही है, जो पहले सिर्फ बड़े देशों के पास हुआ करता था.

इन फैसिलिटी का इस्तेमाल स्टार्टअप्स, एमएसएमई और बड़ी निजी कंपनियां कर सकेंगी. इससे उन्हें करोड़ों रुपये खर्च करके अपनी अलग टेस्टिंग लैब बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यानी छोटी कंपनियों को भी अंतरिक्ष सेक्टर में आगे बढ़ने का बड़ा मौका मिलेगा. डॉ. पवन कुमार गोयनका, चेयरमैन, IN-SPACe

जल्‍द स्‍पेस मैन्‍युफैक्‍चरिंग का बड़ा हब बनेगा भारत
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत को ग्लोबल स्पेस मार्केट में नई ताकत देगा. अभी अमेरिका और चीन इस सेक्टर में बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं, लेकिन भारत कम लागत में बेहतर तकनीक देने की वजह से तेजी से आगे बढ़ रहा है. चंद्रयान और आदित्य-L1 जैसे मिशनों के बाद दुनिया पहले ही भारत की क्षमता देख चुकी है. अब अगर निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में तेजी से काम करने लगीं, तो भारत स्पेस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बन सकता है. सरकार के मुताबिक करीब 10 राज्य ऐसे स्पेस क्लस्टर बनाने में दिलचस्पी दिखा चुके हैं. आने वाले वर्षों में भारत में ‘स्पेस इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन’ देखने को मिल सकता है. इससे रोजगार बढ़ेंगे, विदेशी निवेश आएगा और भारत का नाम अंतरिक्ष की दुनिया में और मजबूत होगा.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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