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बोकारो : जिले के बोकारो स्टील टाउनशिप (शहरी क्षेत्र) में ही लगभग 45 कोचिंग सेंटर चलते हैं। वहीं चास, बेरमो समेत जिले के अन्य छोटे-मोटे स्थानों पर लगभग 50 कोचिंग संस्थानों का संचालन होता है। अधिकांश कोचिंग संस्थानों के पास वैध फायर (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं है। घाटशिला : एक कोचिंग सेंटर है। वहां फायर सेफ्टी की व्यवस्था है। सरायकेला : सरायकेला एवं कुछ अन्य प्रखंडों के कोचिंग सेंटर (लगभग 25-30) के पास एनओसी नहीं है। जामताड़ा : पांच कोचिंग सेंटर हैं। फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं है। गिरिडीह : जिले के किसी भी कोचिंग संस्थान में आग से सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। जिले में कुल 40 कोचिंग सेंटर हैं। लातेहार : जिले में छोटे-छोटे 20 से अधिक कोचिंग संस्थान हैं। किसी भी कोचिंग संस्थान में आग से निपटने की कोई व्यवस्था नहीं है। पलामू : मुख्यालय मेदिनीनगर में 25 कोचिंग संस्थान हैं। पूरे जिले में 100 से अधिक कोचिंग संस्थान हैं। किसी ने लाइसेंस नहीं लिया है। गढ़वा : जिले में आठ कोचिंग सेंटर है, एक में भी कोई व्यवस्था नहीं है। कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है गढ़वा, पलामू, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, कोडरमा और चतरा जैसे जिलों में राज्य सरकार की नई कोचिंग सेंटर नियमावली और फायर सर्विस एक्ट के तहत प्रशासन बेहद सख्त रवैया अपना रहा है। फिर भी स्थिति में खास परिवर्तन नहीं दिख रहा है। कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था मानकों के अनुसार नहीं है। गौरतलब है कि लखनऊ के अलीगंज (पुरानिया इलाका) में स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत की दूसरी मंजिल पर चल रहे ‘लर्निंग स्पेस’ लाइब्रेरी व कोचिंग सेंटर और ‘हेडहॉपर स्टूडियो’ एनिमेशन सेंटर में सोमवार दोपहर आग लग गई। इसमें 15 छात्र-छात्राओं की मौत की पुष्टि हुई है। भास्कर न्यूज | गढ़वा राज्य के अधिकांश जिलों के स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में दमकल की व्यवस्था नहीं है। संकट आने पर जानमाल की अधिक क्षति होने की आशंका रहती है। प्रशासनिक सख्ती के बावजूद, कई छोटे कोचिंग संस्थान और स्कूल अभी भी बिना किसी ठोस फायर सेफ्टी सिस्टम या बिना किसी दूसरे निकास के चल रहे हैं। दुमका, देवघर, पलामू और हजारीबाग जैसे जिलों में बड़े ब्रांडेड संस्थानों में फायर सेफ्टी के उपकरण लगे हैं। छोटे और घरेलू स्तर पर चल रहे ट्यूशन सेंटरों में अभी भी अग्नि सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है। ऐसे संस्थानों को चिह्नित करने के लिए जिला उपायुक्तों ने अनुमंडल स्तर पर टीमों का गठन किया है। राज्य में यह है फायर सेफ्टी का नियम नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 के तहत राज्य के हर स्कूल और कोचिंग संस्थान के लिए उपयुक्त प्राधिकारी से अग्निशमन सुरक्षा प्रमाणपत्र लेना कानूनी रूप से आवश्यक है। बहुमंजिला इमारतों में आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए दूसरी सीढ़ी या इमरजेंसी एक्जिट होना अनिवार्य है। हर छात्र के लिए क्लासरूम में न्यूनतम एक वर्ग मीटर का स्थान होना चाहिए, ताकि आपातकाल के समय भगदड़ न मचे। बेसमेंट से कोचिंग या स्कूल चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
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