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देश के लिए चार बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराने वाले रांची के थ्रो बॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार आज आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। परिवार का गुजारा करने के लिए वे पार्ट टाइम कैब चलाते हैं और खाली समय में अपने पिता के साथ सब्जी बेचने का काम भी करते हैं। सुबह नियमित अभ्यास करने के बाद वे रोजी-रोटी के लिए काम में जुट जाते हैं। प्रतियोगिताओं के दौरान उन्हें कैब चलाना भी बंद करना पड़ता है। अमरदीप ने बताया कि वर्ष 2015 में मलेशिया में आयोजित पहली जूनियर एशियन थ्रो बॉल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2017 में नेपाल में आयोजित इंडो-नेपाल चैंपियनशिप में दूसरा गोल्ड अपने नाम किया। वर्ष 2019 में बेंगलुरु में हुई पहली साउथ एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2026 में रांची के खेलगांव में आयोजित दूसरी साउथ एशियन चैंपियनशिप में चौथी बार गोल्ड जीता। सरकार से नहीं मिला सम्मान चार-चार अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद अमरदीप को अब तक राज्य सरकार की ओर से न तो कोई सम्मान राशि मिली और न ही किसी प्रकार का औपचारिक सम्मान। उनका कहना है कि कई बार खेल विभाग को आवेदन देकर आर्थिक सहायता की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रतिभा को सहारे की जरूरत अमरदीप की कहानी उन खिलाड़ियों की हकीकत बयां करती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और राज्य का गौरव बढ़ाते हैं, लेकिन अपने जीवनयापन के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। सम्मान से वंचित अमरदीप को उम्मीद है कि उनकी उपलब्धियों का उचित मूल्यांकन होगा।
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