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इस एक बीमारी से बच गया मक्का, तो संभाल नहीं पाएंगे फसल, ऐसे करें पहचान और बचाव

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मानसून में मक्के की फसल को फॉल आर्मीवर्म कीट से भारी खतरा है. पौधे जब घुटने तक के होते हैं, तब यह कोमल पत्तियों को तेजी से नुकसान पहुंचाता है. समय पर पहचान कर पौधे के बीच वाले हिस्से में ‘कोराजन’ दवा का छिड़काव करने से फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है.

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पटनाः मानसून के सीजन में कम बारिश होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने धान के विकल्प के रूप में मक्के की खेती की है. कई क्षेत्रों में मक्के की फसल अच्छी बढ़वार पर है और पौधे घुटने तक की अवस्था में पहुंच चुके हैं. यही वह समय है जब मक्के की फसल पर सबसे खतरनाक कीट फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप का खतरा सबसे अधिक रहता है. यदि इस अवस्था में समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह कीट फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.

घुटने तक की अवस्था में सबसे अधिक हमला
कृष्णी विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने लोकल18 को बताया कि फॉल आर्मी वर्म मुख्य रूप से मक्के की कोमल पत्तियों और बढ़वार वाले हिस्से पर हमला करता है. पौधा जब घुटने तक की ऊंचाई पर होता है, तब इसकी पत्तियां मुलायम रहती हैं और कीट आसानी से उन्हें काटकर नुकसान पहुंचाता है. इस दौरान पत्तियों में छेद दिखाई देना, बीच की पत्ती का कटा होना और पौधे की बढ़वार रुक जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं. पौधा बड़ा होने और पत्तियां सख्त होने के बाद इस कीट का प्रभाव काफी कम हो जाता है.

समय पर पहचान है बचाव की कुंजी
उन्होंने कहा कि फसल को लगाने के साथ नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करना जरूरी है. यदि पत्तियों पर छोटे-छोटे छेद, कीट की बीट या पत्तियों के बीच की ओर लार्वा दिखाई दें तो तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाएं. जहां शुरुआती अवस्था में ही कीट पर नियंत्रण कर लेने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है. इससे फसल में होने वाले नुकसान से बचाव होता है.

कोराजन का करें छिड़काव
उन्होंने कहा कि फॉल आर्मी वर्म के नियंत्रण के लिए कृषि विशेषज्ञ कोराजन (Coragen) दवा के उपयोग की सलाह देते हैं. 10 मिलीलीटर कोराजन को 15 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर मक्के की फसल पर समान रूप से छिड़काव करें. दवा का छिड़काव विशेष रूप से पौधे के बीच वाले हिस्से और पत्तियों की कुंडी (व्हॉर्ल) में करें, क्योंकि यही स्थान कीट का मुख्य ठिकाना होता है. आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर आप दोबारा छिड़काव किया जा सकता है.

लापरवाही पड़ सकती है भारी
फॉल आर्मी वर्म बेहद तेजी से फैलने वाला कीट है. यदि समय पर इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो यह बड़ी संख्या में पौधों को नुकसान पहुंचाकर उत्पादन में भारी गिरावट ला सकता है. इसलिए किसान घुटने तक की अवस्था वाले मक्के के खेतों की नियमित निगरानी करें और प्रकोप दिखाई देते ही अनुशंसित दवा का छिड़काव करें. उन्होंने कहा कि सही समय पर निगरानी, पहचान और नियंत्रण ही फॉल आर्मी वर्म से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है, जिससे किसानों की मेहनत और उत्पादन दोनों सुरक्षित रह सकते हैं.

About the Author

Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…

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