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झारखंड में दीवाली के समय घरौंदों की बिक्री काफी देखने को मिलती है. बाजार में प्लास्टिक से लेकर थर्माकोल तक एक से बढ़कर एक मैटेरियल में घरौंदे उपलब्ध हैं. इस बार बड़े पैमाने पर मिट्टी भी घरौंदे देखने को मिल रहे हैं. इन घरौंदों से पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा और ये पर्यावरण के अनुकूल भी रहते हैं.
जमशेदपुर: त्योहारों का सिलसिला शुरू हो गया है और कुछ ही दिनों में दीपावली का त्योहार आने वाला है. ऐसे में बाजारों में भी दिवाली की रौनक देखने को मिल रही है. हर कोई अपने घर को सजाने और दिवाली को खास बनाने की तैयारी में जुटा है. अगर आप इस बार दिवाली को इको फ्रेंडली और सस्टेनेबल तरीके से मनाना चाहते हैं तो जमशेदपुर के ग्राम नाला में लगे इस खास बाजार का रुख कर सकते हैं. यहां झारखंड के प्रसिद्ध चंदनक्यारी से आए कारीगर गंगा मिट्टी से बने खूबसूरत घरौंदे तैयार कर बेच रहे हैं.
इन घरौंदों की खासियत है कि इन्हें पूरी तरह मिट्टी से तैयार किया गया है. देखने में ये बेहद आकर्षक हैं और दिवाली पर घर की सजावट के साथ-साथ बच्चों के लिए भी काफी खास हैं. कीमत की बात करें तो यहां घरौंदों की शुरुआत मात्र 200 रुपये से हो रही है. खास बात यह है कि यहां एक फ्लोर से लेकर चार फ्लोर तक के घरौंदे उपलब्ध हैं. आप अपने बजट और पसंद के अनुसार इन्हें खरीद सकते हैं.
इसके अलावा यहां मिट्टी से बने खूबसूरत दीये और घर की सजावट से जुड़ी कई तरह की सामग्री भी मिल रही है. इनकी डिजाइन और कारीगरी इतनी शानदार है कि बाजार में आने वाले लोग इन्हें देखकर आकर्षित हो रहे हैं. खासकर दिवाली के मौके पर घरौंदा खरीदने वाले परिवारों के लिए यह एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आया है.
लोकल 18 को जानकारी देते हुए सुबोध बताते हैं कि वे लोग झारखंड के चंदनक्यारी से आए हैं और उनका परिवार पूरे साल इसी तरह के मिट्टी से बने उत्पाद तैयार करने का काम करता है. दिवाली के समय इन घरौंदों की मांग काफी बढ़ जाती है. जमशेदपुर के लोग भी इनके बनाए घरौंदों को खूब पसंद कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि हर घरौंदे को काफी मेहनत और बारीकी से तैयार किया जाता है, ताकि यह देखने में सुंदर होने के साथ-साथ मजबूत भी रहे.
सुबोध का कहना है कि आजकल बाजार में प्लास्टिक और थर्माकोल से बने घरौंदे भी खूब बिकते हैं, लेकिन मिट्टी से बने इन उत्पादों की अपनी अलग पहचान है. इसलिए इस दिवाली अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों के लिए प्लास्टिक और थर्माकोल के बजाय मिट्टी से बने घरौंदे खरीदें. इससे बच्चों को पारंपरिक त्योहारों से जुड़ने का मौका मिलेगा और स्थानीय कारीगरों की मेहनत को भी सम्मान मिलेगा.
इस दिवाली अगर आप भी अपने घर को पारंपरिक अंदाज में सजाना चाहते हैं, तो मिट्टी से बने इन खूबसूरत घरौंदों को जरूर अपनाएं. इससे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ ‘लोकल फॉर दिवाली’ को भी बढ़ावा मिलेगा.
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