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कबाड़ से ऐसे बनाया हरा-भरा किचन गार्डन, पलामू की अनु दुबे घर...


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पलामू की अनु दुबे ने अपनी छत पर शानदार किचन गार्डन बनाया है. वह कबाड़ के डिब्बों और बाल्टियों में ऑर्गेनिक सब्जियां उगा रही हैं. लॉकडाउन के दौरान उन्हें यह आइडिया आया था. वह घर पर बनी जैविक खाद का इस्तेमाल करती हैं. इससे उनके परिवार को सालभर ताजी सब्जियां मिलती हैं.

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पलामूः बदलते दौर और खान पान की आदतों के बीच लोग ताजा और रसायनमुक्त भोजन की तलाश में हैं. शहरों में जमीन की कमी के कारण अधिकांश लोग खेती नहीं कर पाते, लेकिन पलामू की एक महिला ने अपनी सोच और मेहनत से इसका अनोखा समाधान खोज निकाला है. उन्होंने घर की छत को ही हरे-भरे किचन गार्डन में बदल दिया है. खास बात यह है कि इस गार्डन को तैयार करने में उन्होंने पुराने डिब्बे, बाल्टी, कार्टन और अन्य कबाड़ के सामान का उपयोग किया है. आज उनके घर की अधिकांश सब्जियों की जरूरत इसी रूफटॉप गार्डन से पूरी हो रही है.

लॉकडाउन में मिला आइडिया
दरअसल, पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के हमीदगंज निवासी आनंद दुबे की पत्नी अनु दुबे बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही गार्डनिंग का शौक था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण इसे समय नहीं दे पाती थीं. कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान घर में अधिक समय मिलने पर उन्होंने इस शौक को नया रूप दिया. घर में पड़े पुराने डिब्बे, बाल्टी और कार्टन में सबसे पहले फूलों के पौधे लगाए ताकि पूजा के लिए बाहर से फूल नहीं खरीदने पड़ें. शुरुआत गुड़हल, गुलदाउदी और कनेर जैसे पौधों से हुई, जो धीरे-धीरे एक बड़े किचन गार्डन में बदल गई.

छत पर उग रही हैं कई तरह की सब्जियां
अनु दुबे ने लोकल18 कि बताया कि फूलों की सफलता के बाद अनु दुबे ने सब्जियों की खेती शुरू की. आज उनकी छत पर बैंगन, मिर्च, धनिया, टमाटर, पालक, लाल साग, हरा साग के साथ-साथ बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी, कद्दू, नेनुआ और करेला भी आसानी से उग रहे हैं. मौसम के अनुसार वे नई-नई सब्जियां लगाती रहती हैं. इससे परिवार को सालभर ताजी और ऑर्गेनिक सब्जियां मिल जाती हैं और बाजार पर निर्भरता भी काफी कम हो गई है.

जैविक खेती पर जोर
अनु दुबे ने आगे बताया कि अपने किचन गार्डन में किसी भी रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करती हैं. वे गोबर की खाद, सब्जियों के छिलकों, चावल की भूसी और अन्य जैविक सामग्री से घर पर ही खाद तैयार करती हैं. मिट्टी में बालू और जैविक खाद मिलाकर पौधों के लिए उपजाऊ माध्यम तैयार किया जाता है. रोजाना सुबह एक से दो घंटे तक पौधों की देखभाल करती हैं, जबकि गर्मी के मौसम में सिंचाई और देखरेख के लिए अधिक समय देना पड़ता है. उनका कहना है कि यदि थोड़ी-सी जगह और लगन हो तो शहर में रहने वाला हर परिवार अपनी छत पर ऑर्गेनिक सब्जियां उगाकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा सकता है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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