सिमडेगा गांव में रहने वाले किसानों के लिए खेती सिर्फ जीवन-यापन का साधन नहीं,बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार भी है। हालांकि पारंपरिक खेती मौसम और बाजार पर निर्भर रहती है। ऐसे में किसान अब खेती के साथ आय के दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। जिले में किसानों को मशरूम उत्पादन से जोड़ने की पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है। कम जगह में शुरू होने वाले मशरूम उत्पादन को किसान अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के साधन के रूप में अपना सकते हैं। उद्यान निदेशालय झारखंड के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में संचालित उद्यान विकास योजना के तहत जिले के विभिन्न प्रखंडों में किसानों के लिए पांच दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में पाकरटांड़ प्रखंड के कैरबेड़ा पंचायत भवन में आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का 27 अगस्त को समापन हुआ। समापन कार्यक्रम में जिला उद्यान पदाधिकारी माधुरी टोप्पो और संबंधित पंचायत की मुखिया विनीता बाड़ा उपस्थित रहीं। दोनों ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले किसानों के बीच प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए। प्रमाण-पत्र मिलने के बाद किसानों में अपने स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने को लेकर उत्साह नजर आया। किताबी जानकारी तक सीमित नहीं रहा प्रशिक्षण, किसानों ने खुद तैयार किया किट कैरबेड़ा में आयोजित प्रशिक्षण की सबसे खास बात यह रही कि किसानों को केवल मशरूम उत्पादन की जानकारी देकर प्रशिक्षण समाप्त नहीं किया गया,बल्कि उन्हें पूरी प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझने और करने का अवसर दिया गया।प्रशिक्षणार्थी किसानों ने स्वयं मशरूम किट तैयार कर उसका प्रदर्शन किया। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि मशरूम उत्पादन किस तरह किया जाता है और इसके लिए किन प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में हाथों से काम करके सीखने से किसानों में तकनीक को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा। बड़े खेत की जरूरत नहीं, छोटे स्तर से भी शुरुआत मशरूम उत्पादन को ग्रामीण किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बनाने वाली एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए पारंपरिक खेती की तरह बड़े खेत की आवश्यकता नहीं होती। किसान उपलब्ध स्थान और अपनी क्षमता के अनुसार इसे छोटे स्तर से शुरू कर सकते हैं। ऐसे किसान जिनके पास सीमित कृषि भूमि है या जो अपनी मौजूदा खेती के साथ अतिरिक्त गतिविधि शुरू करना चाहते हैं,उनके लिए मशरूम उत्पादन एक विकल्प बन सकता है। प्रशिक्षण के जरिए किसानों को इस क्षेत्र में आवश्यक तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है,ताकि वे उत्पादन को व्यवस्थित तरीके से शुरू कर सकें। यही वजह है कि मशरूम उत्पादन को केवल खेती की एक नई तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि कृषि आधारित स्वरोजगार के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
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