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कम बारिश में भी होगी बंपर धान की फसल, देवघर के कृषि...


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कम बारिश में भी होगी बंपर धान की फसल, देवघर के वैज्ञानिक ने बताया रामबाण तरीका

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देवघर और आसपास के इलाकों के किसानों के लिए इस बार डीएसआर तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है. यदि मानसून कमजोर रहता है, तो पारंपरिक रोपाई वाली खेती किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकती है. ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से समय रहते आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील की है.

देवघर: झारखंड के देवघर जिले में इस बार मानसून को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है. ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी उन किसानों के सामने है, जिन्होंने धान की खेती की तैयारी शुरू कर दी है. हर साल धान की खेती में सबसे अधिक खर्च नर्सरी तैयार करने, खेत में पानी भरकर कीचड़ बनाने, मजदूरों से रोपाई कराने और बार-बार सिंचाई करने में होता है. लगातार बढ़ती मजदूरी के कारण खेती की लागत भी तेजी से बढ़ रही है. कई बार किसान पूरी मेहनत और पैसा लगाने के बावजूद उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं कमा पाते. लेकिन अब किसानों के लिए एक ऐसी तकनीक सामने आई है, जिससे खेती की लागत काफी कम हो सकती है और पानी की भी बड़ी बचत होगी.

क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा का कहना है कि किसान इस बार धान की खेती में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) यानी सीधी बुवाई की तकनीक अपनाएं. खासकर ऐसे समय में, जब मौसम विभाग सामान्य से कम बारिश की संभावना जता रहा है. उन्होंने बताया कि इस तकनीक में पारंपरिक धान की खेती की तरह खेत में कीचड़ तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती. किसान पहले खेत की सामान्य जुताई करें. इसके बाद ट्रैक्टर में लगने वाली डीएसआर मशीन से सीधे धान के बीज की बुवाई कर दें. जिस तरह गेहूं की बुवाई की जाती है, उसी तरह धान की भी सीधी बुवाई की जाती है. इससे किसानों का समय भी बचेगा और खेती की लागत भी काफी कम होगी.

नर्सरी और रोपाई की नहीं पड़ती जरूरत
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नर्सरी तैयार करने की आवश्यकता नहीं होती. रोपाई के लिए अलग से मजदूर बुलाने की जरूरत भी नहीं पड़ती. खेत में बार-बार पानी भरने की मजबूरी खत्म हो जाती है. कम पानी में भी धान की फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है. यही वजह है कि जहां पानी की कमी है या बारिश समय पर नहीं हो रही है, वहां यह तकनीक किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. इससे सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम होगा और खेती पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी.

उपज पर नहीं पड़ता कोई खास असर
डॉ. राजन ओझा का कहना है कि यदि किसान समय पर खरपतवार नियंत्रण करें और संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें, तो डीएसआर तकनीक से उपज में कोई खास कमी नहीं आती. कई किसानों को पारंपरिक धान की खेती के बराबर, बल्कि उससे भी बेहतर परिणाम मिले हैं. उन्होंने कहा कि इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि खेती की लागत कम होने से किसानों का शुद्ध मुनाफा बढ़ जाता है. आज जब खेती में लगभग हर चीज महंगी होती जा रही है, ऐसे समय में लागत कम करना ही किसानों के लिए सबसे बड़ा लाभ है.

कमजोर मानसून में कारगर तकनीक
देवघर और आसपास के इलाकों के किसानों के लिए इस बार डीएसआर तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है. यदि मानसून कमजोर रहता है, तो पारंपरिक रोपाई वाली खेती किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकती है. ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से समय रहते आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील की है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस विधि से खेती करने पर पानी की बचत होगी, मजदूरी का खर्च कम होगा और कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकेगा. इससे खेती पहले की तुलना में अधिक लाभदायक बन सकती है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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