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कांग्रेस-राजद भोजपुरी-मगही और अंगिका के पक्ष में, झामुमो विरोध में




जेटेट भाषा विवाद सुलझाने के लिए बनी पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय समिति की बैठक में सहमति नहीं बन पाई। सत्ता पक्ष दो भागों में बंट गया। कांग्रेस और राजद का विचार झामुमो के विपरीत रहा। कमेटी में तीन मंत्री मगही भोजपुरी एवं अंगिका को जेटेट परीक्षा में शामिल करने के पक्ष में रहे, जबकि दो मंत्री इसके विरोध में थे। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, ग्रामीण मंत्री दीपिका पांडेय और उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा, जेटेट में भोजपुरी, मगही और अंगिका जरूरी है। जबकि, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार और पेयजल-स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मंत्रियों के विचार से मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ही इस विषय पर अंतिम निर्णय लेंगे। इस प्रकार यह विवाद अंतत: वैचारिक मतभिन्नताओं पर ही समाप्त हुआ। कैबिनेट की बैठक में भी राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय ने साफ कहा था कि झारखंड के कई जिलों में यह भाषाएं गांव-गांव में बोली जाती हैं, ऐसे में इसे जेटेट से अलग रखना न्यायोचित नहीं, जबकि झामुमो ने इस विचार को खारिज कर दिया। उच्च स्तरीय कमेटी में भी झामुमो एक आेर और कांग्रेस-राजद दूसरी ओर खड़े रहे, फलत: सहमति नहीं बन पाई। 50 लाख से अधिक लोग बोलते हैं भोजपुरी-मगही
झारखंड में बांग्ला-ओड़िया बोलने वालों से चार गुणा अधिक हैं भोजपुरी-मगही भाषी 1928 में जॉर्ज ग्रियर्सन लिखित “लैग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया” के अनुसार मैथिली भाषा देवघर, दुमका, साहेबगंज, पाकुड़ एवं गोड्डा जिले में बोली जाती है। संथाल में कुरमाली बोलने वालों की संख्या दो लाख से अधिक जेटेट में वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाएं शामिल थीं। करीब 40 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने वर्ष 2012 में इन भाषाओं की दी थी परीक्षा। कांग्रेस और राजद के मंत्रियों की अनुशंसा 1 पलामू, गढ़वा, चतरा, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, धनबाद बोकारो, गोड्डा, देवघर में भोजपुरी, मगही भाषा को शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में शामिल किया जाए। 2 रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा, साहेबगंज, धनबाद, सरायकेला-खरसावां जिले में मैथिली एवं अंगिका भाषा को शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली, 2026 के अंतर्गत जोड़ा जाए। 3 जुलाई, 2026 मे संभावित शिक्षक पात्रता की परीक्षा में इन भाषाओं को शामिल करने के बाद ही परीक्षा आयोजित हो। 4 राज्य में प्रशासनिक स्तर पर भाषायी संतुलन बनना आवश्यक है ताकि झारखंड में रहने वाले जनजातीय और गैर जनजातीय वर्ग के हितों की रक्षा हो सके। विवाद सलटाने के लिए बनी कमेटी में ही विवाद बैठक में सुदिव्य कुमार ने कमेटी में नए सदस्यों की मांग उठाई। कहा, समिति में अल्पसंख्यक और जनजातीय मंत्री को भी शामिल किया जाए। भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मसलों पर व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है, ताकि सभी वर्गों की राय को महत्व मिल सके। इस पर राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यह उच्च स्तरीय समिति भाषा और जाति के नाम पर नहीं बनाई गई है। यदि सीएम कोई एक्सटेंशन करेंगे तो देखा जाएगा, फिलहाल यह अंतिम बैठक में है। इसे यहीं समाप्त किया जाए।



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