झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने एक मानवीय और बेहद संवेदनशील निर्णय सुनाते हुए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए), बोकारो के संविदा चपरासी रंजीत कुमार हिमांशु की बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने प्रशासन के रवैये को असंवेदनशीलता से भरा अन्याय करार देते हुए रंजीत को सेवा में बहाल करने और 50 प्रतिशत पिछला वेतन देने का निर्देश दिया है। बता दें कि रंजीत को 31 दिसंबर 2005 को डीआरडीए बोकारो में संविदा पर नियुक्त किया गया था। लगभग 17 वर्षों की सेवा के बाद, मार्च 2022 में डीडीसी द्वारा उन्हें एक अस्पष्ट नोटिस दिया गया। बाद में सामने आया कि उन पर कार्यालय से मात्र चायपत्ती और बिस्कुट घर ले जाने का आरोप था। मई 2022 में प्रशासन ने बिना किसी ठोस कारण के उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। एकल पीठ द्वारा याचिका खारिज होने के बाद रंजीत ने खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की थी। अदालत का कड़ा फैसला 50% वेतन देने का निर्देश रंजीत कुमार हिमांशु को एक जुलाई 2026 तक हर हाल में सेवा में बहाल किया जाए। पिछले चार साल का 50 प्रतिशत बकाया वेतन 31 जुलाई 2026 तक भुगतान किया जाए। बाकी का 50% वेतन कटना ही उनकी कथित गलती के लिए पर्याप्त सजा है। बोकारो के डीसी और डीडीसी को व्यक्तिगत रूप से इस आदेश का पालन सुनिश्चित करना होगा। डीसी को बहाली के संबंध में 10 जुलाई 2026 तक और वेतन भुगतान के संबंध में 10 अगस्त 2026 तक अदालत में अनुपालन का शपथ पत्र दायर करना होगा। मई 2022 में संविदा कर्मी रंजीत कुमार को मामूली बात पर नौकरी से निकाल दिया गया था
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