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Mansoon planting: सफेदा तेजी से बढ़ने वाले पेड़ों में गिना जाता है. इसकी लकड़ी और अन्य उपयोगों के कारण किसानों के बीच इसकी खेती की जाती है. हालांकि इसे लगाने से पहले स्थानीय मिट्टी, पानी की उपलब्धता और आसपास की फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए. हर जमीन पर एक ही प्रजाति लगाना सही नहीं होता. शीशम, सागौन, गम्हार, बांस, नीम, जामुन, अर्जुन, बरगद, कचनार, गुलमोहर, अमलतास और सफेदा जैसे पेड़ किसानों के लिए उपयोगी हैं.
शीशम की लकड़ी के कारण इसकी काफी मांग रहती है. किसान खेत की मेड़ या ऐसी जगह पर इसके पौधे लगा सकते हैं, जहां फसल को परेशानी न हो. समय के साथ पेड़ बड़ा होने पर इसकी लकड़ी उपयोगी होती है. बारिश के मौसम में लगाए गए स्वस्थ पौधों को शुरुआती समय में पर्याप्त नमी मिल जाती है.
सागौन को अच्छी गुणवत्ता वाली लकड़ी के लिए जाना जाता है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर और कई अन्य कामों में किया जाता है. हालांकि इसे तैयार होने में लंबा समय लग सकता है, इसलिए इसे लंबे समय के निवेश के रूप में देखा जाता है. खेत या निजी जमीन पर लगाने से पहले स्थानीय नियमों और कटाई-परिवहन से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.
गम्हार तेजी से बढ़ने वाले पेड़ों में शामिल माना जाता है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर और दूसरे कामों में किया जाता है. अच्छी जमीन और पर्याप्त देखभाल मिलने पर पौधे की बढ़वार अच्छी हो सकती है. किसान इसे खेत की मेड़ या खाली जमीन में लगा सकते हैं.
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बांस को पेड़ की बजाय घास की प्रजाति माना जाता है, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसका महत्व बहुत अधिक है. इसका इस्तेमाल टोकरी, फर्नीचर, सजावटी सामान, निर्माण कार्य और कई घरेलू जरूरतों में होता है. बांस की कई प्रजातियां तेजी से फैलती हैं. इसलिए इसे लगाने से पहले ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां इसके फैलाव से दूसरी फसलों को नुकसान न हो.
नीम को गांवों में लंबे समय से उपयोगी पेड़ माना जाता है. इसके पत्ते, छाल और बीज का पारंपरिक रूप से कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा नीम घना पेड़ बनने के बाद अच्छी छाया देता है. घर, खेत की मेड़ और सामुदायिक स्थानों पर इसे लगाया जा सकता है. हालांकि किसी बीमारी के इलाज के लिए नीम का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए.
जामुन फल देने वाला उपयोगी पेड़ है. बारिश में इसका पौधा लगाने पर जड़ जमाने के लिए प्राकृतिक नमी मिलती है. बड़ा होने के बाद इससे फल प्राप्त होते हैं, जिन्हें स्थानीय बाजार में बेचा भी जा सकता है. जामुन के पेड़ से हरियाली के साथ फल के रूप में अतिरिक्त आमदनी की संभावना रहती है.
अर्जुन एक छायादार और उपयोगी पेड़ है. इसे सड़क किनारे, खेत की मेड़ और खाली स्थानों पर लगाया जा सकता है. आयुर्वेद में भी अर्जुन की छाल का उल्लेख मिलता है, लेकिन किसी स्वास्थ्य समस्या में इसका सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. इसका पौधा सही स्थान और देखभाल मिलने पर अच्छी तरह विकसित हो सकता है.
बरगद बहुत लंबे समय तक जीवित रहने वाले पेड़ों में शामिल है. यह बड़ा होकर घनी छाया देता है और पक्षियों सहित कई जीवों को आश्रय प्रदान करता है. हालांकि इसे लगाने के लिए पर्याप्त जगह जरूरी है, क्योंकि समय के साथ इसकी जड़ें और शाखाएं काफी फैल सकती हैं. इसलिए इसे घर की नींव या छोटी जगह के बिल्कुल पास लगाने से बचना चाहिए.
कचनार को सजावटी और उपयोगी पेड़ के रूप में लगाया जाता है. इसके फूल देखने में सुंदर होते हैं और कई स्थानों पर इनका पारंपरिक रूप से भोजन में भी इस्तेमाल किया जाता है. घर, बगीचे या सड़क किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए इसे लगाया जा सकता है.
गुलमोहर अपनी सुंदर लाल-नारंगी रंग की फूलों के लिए जाना जाता है. सड़क किनारे और पार्कों में इसे अक्सर लगाया जाता है. बारिश के मौसम में पौधे को लगाने से शुरुआती बढ़वार के लिए नमी मिलती है. यह मुख्य रूप से सजावटी और छायादार पेड़ के रूप में उपयोगी है.
अमलतास पीले रंग के सुंदर फूलों के लिए प्रसिद्ध है. गर्मियों में इसके फूल पेड़ को आकर्षक बना देते हैं. इसे घर, बगीचे और सड़क किनारे लगाया जा सकता है. यह पर्यावरण और सुंदरता दोनों के लिहाज से अच्छा विकल्प हो सकता है.
सफेदा तेजी से बढ़ने वाले पेड़ों में गिना जाता है. इसकी लकड़ी और अन्य उपयोगों के कारण किसानों के बीच इसकी खेती की जाती है. हालांकि इसे लगाने से पहले स्थानीय मिट्टी, पानी की उपलब्धता और आसपास की फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए. हर जमीन पर एक ही प्रजाति लगाना सही नहीं होता.