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खेती-किसानी में लोग अपने फल, सब्जी और अनाज आदि की बेहतरीन पैदावार के लिए खाद का इस्तेमाल करते हैं. ये केमिकलयुक्त खाद पौधे में लगे फल, सब्जी और अनाज के साथ ही खेत की मिट्टी के लिए भी नुकसानदायक होता है. इसमें किसानों का पैसा भी खर्च होता है. ऐसे में किसान खुद से ही खाद तैयार कर सकते हैं. खाद तैयार करने में किसानों की मदद केचुआ करेंगे.
बोकारो: आज के समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसान अच्छी पैदावार के लिए कई तरह की खाद का इस्तेमाल करते हैं लेकिन रासायनिक खाद का ज्यादा इस्तेमाल करने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर असर पड़ता है. इससे मिट्टी जहरीली होती है और इसका असर फसल और अनाज पर पड़ता है. ऐसे में केंचुआ खाद किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प है क्योंकि इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और फसलों की अच्छी पैदावार में मदद मिलती है. बोकारो के कृषि वैज्ञानिक आदर्श कुमार ने केंचुआ खाद बनाने की आसान विधि के बारे में जानकारी दी है.
कृषि वैज्ञानिक आदर्श कुमार के अनुसार, केंचुआ खाद तैयार करने के लिए ज्यादा संसाधनों की जरूरत नहीं होती है. जिन किसानों के पास गाय या भैंस हैं वे घर पर ही आसानी से केंचुआ खाद बना सकते हैं. इसके लिए खेत, बगीचे या पेड़ के नीचे छायादार जगह का चुनाव करें. किसान चाहें तो पुआल का छप्पर बनाकर भी खाद तैयार कर सकते हैं. केंचुआ खाद बनाने के लिए दो तरीके अपनाए जा सकते हैं. पहला है ढेर विधि और दूसरा गड्ढा विधि.
ढेर विधि
ढेर विधि में जमीन पर सबसे पहले पुआल बिछाया जाता है और इसके ऊपर गोबर की परत डालकर प्रति वर्गफुट लगभग 35 से 40 केंचुए छोड़े जाते हैं. इसके बाद दोबारा गोबर और जैविक सामग्री की परत डालकर ढेर को जूट के बोरे से ढक दिया जाता है. इसमें नियमित रूप से पानी का छिड़काव करना होता है, ताकि नमी बनी रहे और करीब 30 से 35 दिनों बाद एक बार ढेर की पलटाई कि जाती है इसके बाद लगभग 65 से 75 दिनों में खाद तैयार हो जाती है
गड्ढा बनाकर भी कर सकते हैं उत्पादन
किसान चाहें तो गड्ढा विधि से भी केंचुआ खाद तैयार कर सकते हैं. इसके लिए दो से ढाई फीट गहरा सीमेंटेड गड्ढा बनाया जा सकता है. गड्ढे में अतिरिक्त पानी निकलने के लिए निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए. इसमें गोबर के साथ पौधों की पत्तियां और सब्जियों के डंठल जैसे जैविक अवशेष भी डाले जा सकते हैं. गड्ढे को छायादार जगह पर बनाना चाहिए और ऊपर से जूट के बोरे से ढककर रखना चाहिए. इसमें पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है.
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, केंचुआ खाद तैयार करने में आइसीनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो जैविक पदार्थों को खाद में बदलने में मदद करते हैं. खाद तैयार करने के लिए हमेशा गए या भैंस का ही गोबर डालें. इसमें बकरी, सूअर या घोड़ा आदि दूसरे जानवर का गोबर ना डालें.
नमी और तापमान का रखें ध्यान
केंचुआ खाद तैयार करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. गड्ढे या ढेर में लगभग 70 से 75 प्रतिशत नमी बनाए रखना उपयोगी होता है. वहीं, तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर केंचुओं को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए खाद तैयार करने वाली जगह पर छाया की व्यवस्था जरूरी है. इसके अलावा केंचुओं को चींटियों और पक्षियों से भी बचाना चाहिए. खाद तैयार होने पर यह चायपत्ती जैसी दानेदार दिखाई देने लगती हैं. इसके बाद ही पानी देना बंद कर देना चाहिए.
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मददगार
आखिर में कृषि वैज्ञानिक आदर्श ने सलाह दि है कि किसान भाई, केंचुआ खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ इससे बिक्री कर रोजगार शुरू कर अच्छी कमाई कर सकते हैं क्योंकि मार्केट में केंचुआ खाद की बहुत अधिक डिमांड है. ऐसे में किसान इसकी बिक्री करके भी कमाई कर सकते हैं.
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