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केमिकल छोड़ें, पपीते के पत्ते अपनाएं! कोडरमा के किसान का देसी कीटनाशक,...


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कोडरमा के किसान का देसी कीटनाशक, फसलों को कीटों से रखे सुरक्षित

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बदलते मौसम के साथ खेती की चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. खासकर जैविक (ऑर्गेनिक) खेती करने वाले किसानों के सामने कीटों का हमला एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है. फसल में कीट लगने के बाद उनसे निपटना किसानों के लिए मुश्किल हो जाता है. ऐसे हालात में कोडरमा जिले के कई किसान पारंपरिक और घरेलू उपाय अपनाकर अपनी फसलों को सुरक्षित रख रहे हैं.

कोडरमा जिले के यदुटांड़ निवासी किसान विनोद यादव पिछले कई वर्षों से ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले के समय में, जब बाजार में रासायनिक कीटनाशक आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे, तब उनके पूर्वज पपीते के पत्तों का उपयोग कर कीटों को दूर भगाते थे. यह पारंपरिक तरीका आज भी उतना ही प्रभावी साबित हो रहा है.

विनोद यादव बताते हैं कि पपीते के पत्ते कड़वे होते हैं और इनमें ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं. ये कीटों को फसल से दूर रखने में मदद करते हैं. इस घरेलू कीटनाशक को तैयार करने के लिए दो से चार पपीते के पत्तों को लेकर उन्हें 12 से 24 घंटे तक पानी में भिगोया जाता है, जिससे उनका रस पानी में अच्छी तरह मिल जाता है.

यदि जल्दी घोल तैयार करना हो, तो पत्तों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर धीमी आंच पर 15 से 20 मिनट तक उबाला जा सकता है. इसके बाद घोल को ठंडा कर लिया जाता है और उसमें थोड़ा सा डिटर्जेंट पाउडर मिलाया जाता है, ताकि यह पत्तियों पर अच्छी तरह चिपक सके.

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इस तैयार घोल को स्प्रे बोतल में भरकर सुबह और शाम के समय फसलों पर, खासकर कटे-फटे पत्तों और फूलों पर छिड़काव किया जाता है. नियमित उपयोग से कीटों का प्रभाव काफी कम हो जाता है और फसल सुरक्षित रहती है.

इस प्राकृतिक कीटनाशक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे फसल पर किसी तरह का रासायनिक असर नहीं पड़ता. इससे सब्जियों और अन्य फसलों का स्वाद प्राकृतिक बना रहता है और उनमें किसी भी प्रकार की केमिकल गंध नहीं आती, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.



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