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Jharkhand Rajya Sabha Chunav: झारखंड में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. दो सीटों के लिए होने जा रहे इस मुकाबले में दिग्गज उद्योगपति परिमल नाथवानी की निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में एंट्री हो गई है. नाथवानी के मैदान में आने से न सिर्फ मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर की रणनीति भी पूरी तरह बदलती दिख रही है.
राज्यसभा रण में परिमल नाथवानी की दावेदारी गौरव वल्लभ पर भारी
रांची. राज्यसभा चुनाव में उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी की एंट्री ने झारखंड में मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि भारतीय जनता पार्टी ने अब तक अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन एनडीए खेमे के विधायक नाथवानी के प्रस्तावक बनने की तैयारी में हैं. इससे यह संकेत मिल रहा है कि भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर नाथवानी को मैदान में उतारा जा सकता है. वहीं, ऐसा कहा जा रहा है कि संभव है कि गौरव भल्ला का पत्ता कट गया है. सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि बीजेपी अपने वरिष्ठ नेता गौरव वल्लभ के बजाय पर्दे के पीछे से परिमल नाथवानी को समर्थन देने का मन बना चुकी है. इसके साथ ही झारखंड का यह राज्यसभा चुनाव बेहद पेचीदा मोड़ पर आकर खड़ा हो गया है.
एनडीए के 12 विधायक बनेंगे नाथवानी के प्रस्तावक
सूत्रों के हवाले से जो बड़ी खबर सामने आ रही है, उसके मुताबिक परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र के लिए एनडीए के 12 विधायक प्रस्तावक बनने जा रहे हैं. दरअसल, राज्यसभा चुनाव के नियमों के तहत किसी भी उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने के लिए कम से कम 10 विधायकों के प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर की जरूरत होती है. इस आंकड़े को पार करते हुए नाथवानी के पक्ष में बीजेपी के 9 विधायकों के साथ-साथ सहयोगी दलों जैसे जेडीयू, आजसू (AJSU) और लोजपा (LJP) के विधायकों ने सहमति दे दी है. चर्चा है कि बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व को शीर्ष स्तर से निर्देश मिले हैं कि वे परिमल नाथवानी के प्रस्तावकों की सूची को अंतिम रूप दें, जिससे उनकी दावेदारी बेहद मजबूत हो चुकी है.
गौरव वल्लभ के आगे निकलने की उम्मीदों को झटका
दरअसल, कुछ दिनों पहले तक यह माना जा रहा था कि बीजेपी अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ को झारखंड से उच्च सदन में भेजने की तैयारी कर रही है. गौरव वल्लभ ने शनिवार को इस सीट के लिए बाकायदा नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह था. लेकिन परिमल नाथवानी की धमाकेदार एंट्री के बाद बीजेपी के चुनावी समीकरण पूरी तरह पलट गए हैं. जानकारों का कहना है कि चुनावी मैनेजमेंट और विधायकों के बीच पकड़ के मामले में परिमल नाथवानी का कद गौरव वल्लभ पर भारी पड़ता दिख रहा है. वह पहले भी साल 2008 और 2014 में झारखंड से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा का सफर तय कर चुके हैं. ऐसे में बीजेपी अब किसी तरह का जोखिम न लेते हुए एक सुरक्षित और जिताऊ समीकरण पर दांव लगा रही है.
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा सीटों का समीकरण
बता दें कि झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवारों ने पर्चे खरीदे हैं. सत्ताधारी इंडिया गठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैद्यनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है. शुरुआत में दोनों दलों के बीच तनातनी देखने को मिली थी, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस पर्यवेक्षक भूपेश बघेल की बैठक के बाद गठबंधन ने एकजुट रहने का दावा किया है. जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है. इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का मजबूत बल है, जो कागजों पर उनकी दोनों सीटों की जीत पक्की करता है. लेकिन नाथवानी और वाईएसआर कांग्रेस के नेता वी. विजयसाई रेड्डी जैसे दिग्गजों की निर्दलीय मौजूदगी ने क्रॉस-वोटिंग की आशंका को बढ़ा दिया है.
हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद बढ़ीं धड़कनें
बताया जा रहा है कि परिमल नाथवानी केवल एनडीए के भरोसे ही चुनावी मैदान में नहीं हैं. उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर मुलाकात की है. नाथवानी के सभी राजनीतिक दलों और कई विपक्षी विधायकों के साथ बेहद मधुर और पुराने व्यापारिक व व्यक्तिगत संबंध रहे हैं. रणनीतिकारों का मानना है कि यदि बीजेपी और एनडीए के वोट नाथवानी को मिलते हैं, तो उन्हें जीत के लिए महज कुछ अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी, जिसे इंडिया गठबंधन के असंतुष्ट विधायकों के जरिए जुटाना उनके लिए मुश्किल नहीं होगा. ऐसे में कांग्रेस के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखना सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है.
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