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Benefits of Lahchichra: गांवों और ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिन्हें लोग अक्सर सामान्य खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते है. खेतों की मेड़, खाली जमीन और आसपास के इलाकों में उगने वाला लहचिचरा भी ऐसा ही पौधा है. देखने में साधारण नजर आने वाले इस पौधे का पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अलग महत्व बताया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने समय से इसके अलग-अलग हिस्सों का इस्तेमाल कई घरेलू उपचारों में किए जाने की परंपरा रही है. हालांकि, औषधीय पौधों का इस्तेमाल करने से पहले उनकी सही पहचान और विशेषज्ञ की सलाह बेहद जरूरी है.
गांवों और ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं. जिन्हें लोग सामान्य खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते है. लहचिचरा भी ऐसा ही एक पौधा है. यह खेतों, खाली जमीन और आसपास के क्षेत्रों में आसानी से दिखाई दे जाता है. हालांकि, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस पौधे का अलग महत्व बताया गया है. इसके विभिन्न हिस्सों का उपयोग पुराने समय से घरेलू और पारंपरिक उपचार में किया जाता रहा है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते है कि लहचिचरा को कई जगहों पर स्थानीय नामों से भी जाना जाता है. इसके औषधीय उपयोगों को लेकर लोक चिकित्सा में कई तरह की मान्यताएं प्रचलित है. हालांकि, किसी भी पौधे का सेवन या औषधि के रूप में इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए.
त्वचा संबंधी समस्याओं में प्रयोग : लहचिचरा का पारंपरिक रूप से त्वचा से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी इस्तेमाल बताया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में पौधे के हिस्सों को स्थानीय तरीके से प्रयोग करने की परंपरा रही है. किसी भी तरह के त्वचा रोग में इसे सीधे लगाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि गलत इस्तेमाल से जलन या एलर्जी हो सकती है.
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घाव और चोट में पारंपरिक इस्तेमाल: कुछ लोक चिकित्सा पद्धतियों में लहचिचरा के पौधे का उपयोग छोटे-मोटे घाव या चोट में भी बताया जाता है. माना जाता है कि इसके कुछ हिस्सों का पारंपरिक तरीके से इस्तेमाल घाव की देखभाल में किया जाता था. लेकिन खुले या गहरे घाव पर बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी पौधे का लेप लगाना सुरक्षित नहीं माना जाता.
पेट से जुड़ी समस्याओं में भी उल्लेख लहचिचरा का पारंपरिक चिकित्सा में पेट से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए भी उपयोग बताए जाने की जानकारी मिलती है. इसके सेवन की मात्रा और तरीका अलग-अलग स्थानीय परंपराओं में अलग हो सकता है. इसलिए इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर खुद से खाना या इसका काढ़ा बनाकर पीना उचित नहीं है.
औषधीय पौधों के मामले में सबसे जरूरी बात उनकी सही पहचान है. कई बार एक जैसे दिखने वाले अलग-अलग पौधों को लोग एक ही समझ लेते है. इससे नुकसान हो सकता है. इसलिए लहचिचरा का इस्तेमाल करने से पहले किसी जानकार वनस्पति विशेषज्ञ या आयुर्वेद चिकित्सक से इसकी सही पहचान कराना जरूरी है.
डॉक्टर की सलाह के बिना न करें सेवन: किसी भी औषधीय पौधे का प्राकृतिक होना यह साबित नहीं करता कि वह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और पहले से दवा लेने वाले लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए. किसी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवा बंद करके लहचिचरा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.