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भास्कर न्यूज | इटखोरी/पत्थलगड़ा चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड के करनी गांव स्थित बामणी तालाब की खुदाई के दौरान एक प्राचीन प्रतिमा और कई पुरातात्विक अवशेष मिलने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। हिंदू देवी-देवता की प्रतिमा मिलने के बाद उसे पीपल पेड़ के नीचे रख कर पूजा पाठ किया जा रहा है। तालाब से जेसीबी के माध्यम से मिट्टी निकाली जा रही थी। इसी दौरान चालक विकास कुमार दांगी की नजर काले पत्थर से बनी प्रतिमा और प्राचीन मंदिर के अवशेष पर पड़ी। प्रतिमा मिलने की सूचना फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना शुरू कर दी। ग्रामीण श्रवण कुमार वर्मा ने बताया कि तालाब की दो से तीन फीट गहराई में खुदाई के दौरान करीब ढाई से तीन फीट ऊंची यह प्रतिमा प्राप्त हुई है। ग्रामीण इसे शुभ संकेत मान रहे हैं। पुरातत्वविद् डॉ. उदेश कुमार ने प्रतिमा की पहचान उमा महेश्वरी की प्रतिमा के रूप में करते हुए बताया कि यह पाल कालीन प्रतीत होती है और इसका कालखंड 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का हो सकता है। उन्होंने बताया कि यह मूर्ति शिव-पार्वती की आलिंगन मुद्रा को दर्शाती है। प्रतिमा में भगवान शिव के चरणों के नीचे नंदी तथा माता पार्वती के चरणों के नीचे सिंह अंकित है, जो दांपत्य प्रेम और पारिवारिक स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। ^इटखोरी और उसके आसपास के क्षेत्रों से पूर्व में भी अनेक प्राचीन प्रतिमाएं प्राप्त हो चुकी हैं। इटखोरी स्थित प्राचीन भद्रकाली मंदिर तथा ऐतिहासिक बिहारी स्थान में भी इस प्रकार की प्रतिमाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इटखोरी से मयूरहंड के बीच पुरातत्व विभाग द्वारा उमा महेश्वर की 12 से 15 प्रतिमाओं की पहचान की जा चुकी है। यह क्षेत्र पाल कालीन सभ्यता और सांस्कृतिक धरोहरों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में इस नई प्रतिमा की प्राप्ति से क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ गई है।^ -डॉ. ललित आदित्य, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज के सहायक प्रोफेसर और झारखंड के कई शोध और खुदाई का हिस्सा रहे ।
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